इसके अलावा यदि कोई पर्यटक धरोहर राशि जमा कर सामग्री खरीदता है। लेकिन जब वापस आने पर यदि दुकान बंद मिला तो पर्यटक क्या करेगा। वह धरोहर राशि को वापस लेने के लिए दुकानदार की तलाश करेगा या दुकान खुलने का इंतजार करेगा? ऐसे में नुकसान पर्यटक का होगा कि उसे पांच रुपये के चिप्स पैकेट के लिए 55 रुपये चुकाने पड़े।
साथ ही किसने मेरी दुकान से चिप्स का पैकेट खरीदा और कौन वापस कर रहा है ये कैसे पता चलेगा। अगर कोई धरोहर राशि खरीद कर सामग्री खरीदता है तो बेकार पैकेट/रैपर वापस कब करेगा। क्या इसके लिए कोई समय सीमा है या कोई टोकन सिस्टम होगा। यह कुछ भी अबतक साफ नहीं है। इससे तो अच्छा है कि घाटों पर डस्टबीन की संख्या बढ़ा दी जाए।