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Varanasi: चिप्स के पैकेट के लिए भी 50 रुपये की धरोहर राशि! नगर निगम के फरमान से गंगा घाट के दुकानदार कन्फ्यूज

Mon, 03 Jul 2023 12:02 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी नगर निगम का आदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें लिखा है कि प्लास्टिक की बंद बोतल पानी के साथ चिप्स के पैकेट जैसी सामग्री की बिक्री के दौरान ग्राहक से 50 रुपए धरोहर राशि दुकानदार लेगा।
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दशाश्वमेध क्षेत्र में दुकानदारों को नोटिस के बारे में बताते नगर निगम कर्मी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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शहर और गंगा घाटों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के अभियान से संबंधित वाराणसी नगर निगम का एक आदेश सुर्खियों में है। गंगा घाटों के आस-पास प्लास्टिक में सामान देने वाले दुकानदार 50 रुपये धरोहर राशि ग्राहक से लेंगे। ग्राहक जब सामान का इस्तेमाल करने के बाद प्लास्टिक पैकेट वापस करेंगे तो उन्हें 50 रुपये वापस करेंगे। ऐसा नहीं करने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई होगी। नगर निगम के इस फरमान से गंगा घाटों के दुकानदार भ्रम में हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इस आदेश का पालन कैसे होगा।

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नगर निगम का आदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें लिखा है कि प्लास्टिक की बंद बोतल पानी के साथ चिप्स के पैकेट जैसी सामग्री की बिक्री के दौरान ग्राहक से 50 रुपए धरोहर राशि दुकानदार लेगा। धरोहर राशि ग्राहक को उस समय वापस होगा, जब वह दोबारा दुकानदार को खाली पानी की बोतल या प्लास्टिक की सामग्री के रैपर-पैकेट वापस करेंगे। यदि कोई दुकानदार या ग्राहक ऐसा नहीं करता है तो उसके खिलाफ कड़ी विधिक कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात भी कही गई है।
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दशाश्वमेध क्षेत्र में यह नोटिस दुकानदारों में बांटा गया है। इस नोटिस के बाद से दुकानदार भ्रम में हैं। उनका कहना है कि नोटिस में स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। ऐसे में कोई पांच रुपये का चिप्स का पैकेट खरीद रहा है तो वह 50 रुपये जमा नहीं करेगा। ऐसे में दुकानदारी प्रभावित होगी।

इन सवालों के नहीं हैं जवाब

इसके अलावा यदि कोई पर्यटक धरोहर राशि जमा कर सामग्री खरीदता है। लेकिन जब वापस आने पर यदि दुकान बंद मिला तो पर्यटक क्या करेगा। वह धरोहर राशि को वापस लेने के लिए दुकानदार की तलाश करेगा या दुकान खुलने का इंतजार करेगा? ऐसे में नुकसान पर्यटक का होगा कि उसे पांच रुपये के चिप्स पैकेट के लिए 55 रुपये चुकाने पड़े।
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साथ ही किसने मेरी दुकान से चिप्स का पैकेट खरीदा और कौन वापस कर रहा है ये कैसे पता चलेगा। अगर कोई धरोहर राशि खरीद कर सामग्री खरीदता है तो बेकार पैकेट/रैपर वापस कब करेगा। क्या इसके लिए कोई समय सीमा है या कोई टोकन सिस्टम होगा। यह कुछ भी अबतक साफ नहीं है। इससे तो अच्छा है कि घाटों पर डस्टबीन की संख्या बढ़ा दी जाए।  
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