हनुमान पूजा
श्रावण महीने में शनिवार को हनुमानजी की आराधना करने से हर तरह की बीमारियां दूर हो जाती है। मानसिक और शरीरिक रुप से मजबूती मिलती है। हनुमानजी की कृपा से कामकाज में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं। सोचे हुए काम पूरे होने लगते हैं। बुद्धि और वैभव बढ़ता है। शत्रु नष्ट हो जाते हैं और प्रसिद्धि मिलती है।
शनि और शिव पूजा
भगवान शिव, शनिदेव के गुरु हैं। शिवजी ने ही शनिदेव को न्यायाधीश का पद दिया था। जिसके फलस्वरूप शनि देव मनुष्यों को कर्मों के मुताबिक फल देते हैं। इसलिए श्रावण के महीने में भगवान शिव के साथ साथ शनिदेव की उपासना करने से शुभ फल मिलते हैं। भगवान शिव के अवतार पिप्पलाद, भैरव और रुद्रावतार हनुमान जी की पूजा भी शनि के अशुभ असर से रक्षा करती है।
नृसिंह पूजा
स्कन्दपुराण के मुताबिक सावन के शनिवार को सुबह तिल का उबटन लगाकर नहाना चाहिए। इसके बाद भगवान नृसिंह की विशेष पूजा करनी चाहिए। उड़द दाल से बनी खिचड़ी का नैवेद्य लगाना चाहिए। फिर ब्राह्मणों को भी प्रसाद का भोजन करवा कर दक्षिण देनी चाहिए। ऐसा करने से भगवान नृसिंह प्रसन्न होते हैं। धन और धान्य बढ़ता है। इसके साथ ही हर तरह का सुख भी मिलता है।