यूनेस्को की ओर से मान्यता प्राप्त संपत्ति में चौखंडी स्तूप और सारनाथ का पुरातात्विक परिसर शामिल है। चौखंडी स्तूप उस स्थान का प्रतीक माना जाता है जहां भगवान बुद्ध का अपने पांच प्रथम शिष्यों से मिलन हुआ था। वहीं, पुरातात्विक परिसर में धमेख स्तूप, प्राचीन विहारों के अवशेष और सम्राट अशोक का प्रसिद्ध स्तंभ शामिल हैं। ये स्मारक सारनाथ के बौद्ध धर्म के प्रमुख केंद्र के रूप में विकास की ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाते हैं।
बौद्ध धर्म में सारनाथ का विशेष महत्व है। यहीं भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश देकर धर्मचक्र प्रवर्तन किया था। इसी स्थान से बौद्ध संघ की स्थापना और करुणा, शांति तथा मध्यम मार्ग का संदेश पूरी दुनिया में प्रसारित हुआ। करीब 2600 वर्षों से यह स्थल बौद्ध श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इसे उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विरासत स्थलों के संरक्षण और विकास के प्रयासों का यह परिणाम है। उनके अनुसार, इस मान्यता से उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी और प्रदेश का शांति एवं आध्यात्मिकता का संदेश दुनिया तक और प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।
पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि सारनाथ को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने से विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और उन्हें उत्तर प्रदेश के अन्य बौद्ध स्थलों से जोड़ने में मदद मिलेगी। वहीं, संरक्षण वास्तु विशेषज्ञ आभा नारायण लांबा ने कहा कि सारनाथ केवल स्मारकों का समूह नहीं, बल्कि जीवंत सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का केंद्र है, जहां आज भी ढाई हजार वर्षों पुरानी बौद्ध परंपरा जीवित है।