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संत गणेश प्रसाद वर्णी ने दान से स्थापित किया स्याद्वाद महाविद्यालय

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जैन धर्म के विद्वान विमल कुमार जैन ने कहा कि 115 साल पहले जैन धर्म की शिक्षा का सर्वविद्या की राजधानी में कोई संस्थान नहीं था। संत गणेश प्रसाद वर्णी ने दान से स्याद्वाद महाविद्यालय की स्थापना की। उन्होंने एक रुपये के दान से 64 पोस्टकार्ड खरीदे और उसके जरिये दान एकत्र किया था। वह शनिवार को संत गणेश प्रसाद वर्णी की 147वीं जयंती पर भदैनी घाट स्थित स्याद्वाद महाविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
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अध्यक्षता करते हुए प्रो. फूलचंद प्रेमी ने दूरदर्शिता की चर्चा करते हुए नमन किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. संजीव सर्राफ ने कहा कि वर्णी जी ने हिंदू होकर भी जैन धर्म पर जो उपकार किया है उसके चलते हजारों जैन विद्वान इस महाविद्यालय से शिक्षा ग्रहण कर सके हैं। इस दौरान डॉ. निर्मला जैन, डॉ. अरविन्द त्रिपाठी, रंजन कुमार जैन, सुरेन्द्र कुमार जैन, प्रो. बिमल कुमार जैन आदि मौजूद रहे।
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