प्रसिद्ध इतिहासकार कोनराड एल्स्ट ने ‘हिंदू होलोकास्ट हिंदू संस्कृति पर दो हजार वर्षों तक हुए हमले’ विषय पर कहा कि हिंदुस्तान में 636 ई. से हिंसक हमले शुरू हुए। इस हमले में 11वीं शताब्दी से लेकर 16वीं शताब्दी के शुरुआत तक लगभग 8 से 10 करोड़ हिंदुओं का नरसंहार हुआ। इतिहासकार विक्रम संपथ ने कहा कि भारतीय संस्कृति और हिंदुत्व पर हुए हमले से हमें सीख लेनी चाहिए।
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि उपासना स्थल कानून को अचानक बना दिया गया था, लेकिन लोगों ने मन से इसे स्वीकार नहीं किया। इसे भी बदलना आवश्यक है। कुछ वामपंथी एनजीओ और चर्च द्वारा हिंदुओं में ऐसी भावना पैदा कर दी गई है कि हमें लगे कि हम ही गलत है।
सरकारें मस्जिद और चर्च में तो हस्तक्षेप नहीं करती लेकिन मंदिर में हस्तक्षेप करती है। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि उपासना स्थल कानून को काला कानून बताया। वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि देश को विकास के लिए एक समान नागरिक संहिता आवश्यक है।
प्रो. वाचस्पति ने कहा कि लॉर्ड मैकाले शिक्षा पद्धति ने हमारी संस्कृति में ही छेद कर दिया है। हमारे वैदिक संस्कृति सभ्यता को पंगु बना दिया है। मैकाले शिक्षा पद्धति ने हमारे युवाओं को वेदों के बारे में न जानने के लिए अपनी शिक्षा नीति हम पर थोपी तथा फूट डालो और राज करो की नीति अपनाई। प्रो. राम किशोर त्रिपाठी ने कहा किसंक्रामक रोगों से लड़ने के लिए हमारे वेदों में पहले से ही भोजन को एकांत में करने की व्यवस्था बनाई गई है।
अभिनेता अखिलेंद्र मिश्र ने कहा कि फिल्मों से भारतीय संस्कृति गायब है। यह दु:खद है। वर्तमान समय में इसके कारण युवाओं पर कुप्रभाव पड़ रहा है तथा युवा अपराध की ओर बढ़ रहे हैं। जगदगुरु स्वामी राजराजेश्वराचार्य ने कहा कि आज के युवाओं को अपने वेदों का पाठ करना चाहिए और उन्हीं कहानियों से जुड़ी फिल्मों को देखना चाहिए।