संकटमोचन मंदिर में छह दिवसीय मुक्ताकाशीय संगीत महाकुंभ की पूर्णाहुति हरीश के गायन से हुई। अंतिम निशा में संगीत रसिकों के चेहरे पर संगीत समारोह के समापन की उदासी साफ झलक रही थी। सबके मन में एक ही भाव था कि काश ये पल यहीं ठहर जाए और संगीत का यह सिलसिला यूं ही चलता रहे। वह पड़े रहे प्रभु हनुमान के श्री चरणों में। एक तरफ स्वरों की अमृत वर्षा, दूसरी ओर प्रभु का आशीष पाकर कलाकार ही नहीं श्रोता और श्रद्धालु भी धन्य हो उठे।
सोमवार मध्य रात्रि में चौथी प्रस्तुति में हैदराबाद से पधारे डॉ. येला वेंकटेश्वर राव ने मृदंगम से सम्मोहन का जादू बिखेरा। अपने सह शिल्पी वृदों के साथ अच्छी लयकारियां की। पांचवीं प्रस्तुति में विख्यात पार्श्व गायिका कविता कृष्णमूर्ति ने कई मर्मस्पर्शी भजन गाकर अपनी प्रस्तुति को विराम दिया। डॉ. एल. सुब्रहमणियम ने वायलिन वादन प्रस्तुत किया। कर्नाटक शैली में कई रचनाएं बजाकर उन्होंने अपनी प्रस्तुति समाप्त की। कर्नाटक शैली में वादन होने के बावजूद उत्तर भारतीय संगीत का पूरा आनंद मिला। तन्मय बोस, आदित्य ओक, निनाद मुलावकर, बीवी रमाणमूर्ति, जी सत्यसाईं ने सहयोगी की भूमिका निभाई।
आकाश ने स्वरों की बारिश कर दी। आपने बांसुरी पर राग झिंझोटी की अवतारण किया। आलापचारी के पश्चात झप ताल व तीन ताल में वादन को विराम दिया। ईशान घोष ने तबले पर लाजवाब साथ निभाया। सातवीं प्रस्तुति में दिल्ली से पधारे ग्वालियर घराने के प्रतिष्ठित गायक पं. मधुप मुद्गल ने राग भैरव का अवतारण किया। तबले पर शंभूनाथ भट्टाचार्य व संवादिनी पर विनय मिश्र ने कुशल भागीदारी निभाई।
संगीत महाकुंभ की पूर्ण आहुति मंगलवार भोर में दिल्ली के पं. हरीश तिवारी के गायन से हुई। तबले पर शैलेंद्र मिश्र व संवादिनी पर विनय मिश्र ने सकुशल साथ निभाया। मंच संचालन पं. हरिराम द्विवेदी, सौरभ चक्रवर्ती ने हिंदी में तथा कोलकाता की चंद्रिमा राय ने अंग्रेजी में किया।
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शताब्दी वर्ष का आयोजन 10 से
संकट मोचन संगीत समारोह के शताब्दी वर्ष का आयोजन अगले साल होगा। इसकी तिथि भी निर्धारित कर दी गई है। अगले वर्ष 10 अप्रैल से 15 अप्रैल-2023 तक संकट मोचन संगीत समारोह का आयोजन होगा।