संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव कपिल किशोर लाल अंतत: विश्वविद्यालय से कार्यमुक्त हो गए। इस्तीफा देने के दो माह बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सहायक कुलसचिव को कार्यमुक्त किया। दो दिन पहले ही सहायक कुलसचिव ने कार्यमुक्त करने के लिए आत्मदाह तक की धमकी भी दी थी। आननफानन में विश्वविद्यालय ने कार्यमुक्त किया।
विश्वविद्यालय की ओर से कार्यमुक्त होने का आदेश मिलते ही कपिल किशोर लाल ने प्रयागराज में केंद्रीय महालेखाकार कार्यालय में प्रभागीय लेखा अधिकारी पद पर कार्यभार भी ग्रहण कर लिया। वेतन विसंगतियों से क्षुब्ध होकर कपिल किशोर ने आठ जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने इसकी प्रतिलिपि शासन को भेज दी थी।
खास बात है कि वह 13 जनवरी को संस्कृत विश्वविद्यालय में सहायक कुलसचिव पद पर कार्यभार ग्रहण किए थे। इससे पहले वह केंद्रीय महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) द्वितीय प्रयागराज में प्रभागीय लेखा अधिकारी पद पर कार्यरत थे। कुलसचिव डा. ओमप्रकाश का कहना है कि उनकी नियुक्ति शासन से हुई थी। उन्होंने इस्तीफे की प्रतिलिपि शासन को भी भेजी थी। शासन की स्वीकृति मिलने में देरी के कारण उन्हें कार्यमुक्त करने में दो माह लग गए।