संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में अंकपत्र और प्रमाणपत्रों के फर्जीवाड़े को रोक ने के लिए तैयारी की जा रही है। प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए अब छात्र-छात्राओं को विश्वविद्यालय का चक्कर भी नहीं लगाना पड़ेगा। शासन के आदेश पर विश्वविद्यालय के अंकपत्रों और प्रमाणपत्रों को ऑनलाइन किया जाएगा। इसके लिए नेशनल एकेडमिक डिपोजाटरी (एनएडी) को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के परीक्षा संबंधी डाटा को एनएडी से लिंक किया जाएगा। डाटा लिंक होने के बाद कहीं से कोई भी अंकपत्र और प्रमाणपत्रों का सत्यापन कर सकता है। अपर मुख्य सचिव (उच्च शिक्षा) ने इस सिलसिले में सभी कुलपतियों को पत्र लिखकर इसे व्यवस्था को जल्द शुरू कराने की बात कही थी।
पत्र में उनसे अनुरोध किया गया था कि ऑनलाइन डाटा कार्यदायी संस्था सीडीएसल को उपलब्ध करा दें। भविष्य में इसे ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल से भी जोड़ा जाएगा। प्रदेश स्तर पर पोर्टल एक माह में शुरू हो जाएगा। सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में 1998 से परीक्षा संबंधी अभिलेख डिजिटल हो चुके हैं।
सिस्टम मैनेजर विजय मणि त्रिपाठी ने बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से सभी डाटा कार्यदायी संस्था को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। शासनादेश के अनुसार 2015 से विश्वविद्यालय के अंकपत्रों और प्रमाणपत्रों का डाटा ऑनलाइन किया जाएगा।
संस्था की ओर से अभी 2017 के अंकपत्रों को ऑनलाइन किया गया है। यह प्रक्रिया अभी प्रायोगिक दौर में चल रही है। सिस्टम लागू होते ही छात्रों को विश्वविद्यालय की ओर से एक यूनिक आईडी और पासवर्ड दिया जाएगा जिससे कि वह भविष्य में अपने अंकपत्र व प्रमाणपत्र को कहीं से भी ऑनलाइन प्राप्त कर सकेगा।