नंद किशोर रुंगटा के अपहरण से उनका परिवार 26 वर्ष बाद भी उबर नहीं पाया है। इसका उदाहरण शुक्रवार को भी तब देखने को मिला, जब वादी पक्ष का कोई सदस्य अदालत का आदेश सुनने के लिए नहीं आया। अदालत के आदेश के बाद भी अन्य दिनों की तरह जवाहर नगर एक्सटेंशन स्थित महावीर प्रसाद रुंगटा के घर पर सन्नाटा पसरा रहा और कोई बात करने के लिए बाहर नहीं आया।
26 वर्ष पहले मुकदमा दर्ज करने के दौरान भी वादी पक्ष इतना डरा हुआ था कि अपने घर से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित भेलूपुर थाने जाकर तहरीर देने की हिम्मत नहीं जुटा सका था। वादी महावीर प्रसाद रुंगटा ने अपने बयान में अदालत में कहा था कि भयभीत होने के कारण ही हमने डीआईजी रेंज को तहरीर दी और मामले को गोपनीय रखने को कहा था। वादी ने यह भी कहा कि अभियुक्त के विरुद्ध पहले से ही अपहरण, हत्या और हत्या के प्रयास के आरोपी में 23 एफआईआर दर्ज थी। ऐसे में हमारे पास झूठा मुकदमा दर्ज कराने का कोई कारण नहीं था। हम एक व्यवसायी परिवार से हैं और झूठा मुकदमा दर्ज कराकर हम अपने व्यवसाय और परिवार की क्षति का जोखिम कभी नहीं लेंगे।
मुख्तार की आवाज से हर कोई परिचित था
वादी पक्ष ने कोर्ट में कहा कि अभियुक्त घटना से पहले राजनीति में था। वर्ष 1996 में विधायक चुना गया था। वह जगह-जगह जनसभाओं को संबोधित करता था। वाराणसी में भी उसका प्रभाव था और सामान्य व्यक्ति भी उसकी आवाज से परिचित था। ऐसे में आवाज पहचानने के लिए अभियुक्त से मिलना आवश्यक नहीं था। वादी ने टेलीफोन पर अभियुक्त की आवाज पहचान ली थी, उसने स्वयं अपने नाम से फोन किया था।
घर के पास मंडराते थे संदिग्ध
वादी ने अदालत में कहा कि मुख्तार अंसारी ने धमकी दी थी कि बनारस के समुदाय विशेष का हमें समर्थन प्राप्त है। इसके पहले भी मुख्तार अंसारी गिरोह के लोगों ने हमें और हमारे परिवार को जान से मारने की धमकी दी थी। हमारे घर के आसपास मुख्तार अंसारी गिरोह के संदिग्ध लोग मंडराते देखे जाते थे। उन लोगों को हमारे परिवार के लोगों के साथ ही पड़ोसियों ने भी देखा था।
मिर्जापुर में तैनात डिप्टी एसपी ने की थी विवेचना
महावीर प्रसाद रुंगटा को धमकाए जाने संबंधी मुकदमे की तत्कालीन दुर्गाकुंड चौकी इंचार्ज और मौजूदा समय में मिर्जापुर में क्षेत्राधिकारी सदर के पद पर तैनात डिप्टी एसपी शैलेंद्र त्रिपाठी ने की थी।
मुकदमे का फैसला आने पर डिप्टी एसपी शैलेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि उस समय मुख्तार अंसारी का दबदबा था। मेरी नौकरी महज सात साल की थी। मगर, किसी के प्रभाव या दबाव में आए बगैर वादी और अन्य गवाहों के बयान के आधार पर हमने आरोप पत्र तैयार कर अदालत में दाखिल किया था। अदालत में जिरह के लिए बुलाया गया, तब भी वही बात कही, जो विवेचना के दौरान पाई थी। इस मामले में अभियोजन ने छह गवाह पेश किए थे। इनमें वादी महावीर प्रसाद रुंगटा, नंद किशोर रुंगटा के बेटे प्रवीण व नवीन, महावीर का ड्राइवर द्वारिका प्रसाद, भेलूपुर थाने का तत्कालीन हेड मोहर्रिर हिंचलाल गौड़ और विवेचक शैलेंद्र त्रिपाठी शामिल हैं। अदालत में द्वारिका प्रसाद गवाही से मुकर गया था।
आदेश के खिलाफ करेंगे अपील : श्रीनाथ त्रिपाठी
मुख्तार अंसारी के अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि अदालत के आदेश के खिलाफ निश्चित रूप से अपील दाखिल करेंगे। हमारा आधार यह है कि नंद किशोर रुंगटा के अपहरण के बाद उनके घर के प्रत्येक टेलीफोन सर्विलांस के रडार पर थे और कॉल रिकॉर्डिंग हो रही थी। ऐसी स्थिति में वादी महावीर प्रसाद रुंगटा के द्वारा अदालत को यह नहीं बताया जा सका कि किस नंबर पर धमकी भरा फोन आया था। यह तथ्य अविश्वसनीय है और यही हमारी अपील का मुख्य आधार होगा।