विशाल भारत संस्थान में सामाजिक समरसता महिला सम्मेलन
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महिलाएं भारतीय संस्कृति की संवाहक हैं। भारतीय सांस्कृतिक विरासत को बेटी, बहू और मां के रूप में पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित करती हैं। उन्हें जाति-धर्म में नहीं बांटा जा सकता। जो लोग उनकी भूमिका को नगण्य मानते हैं, उन्हें उनकी महत्ता समझनी होगी।
रसोई से लेकर देश और समाज को दिशा देने तक हर कहीं महिलाओं ने अपनी योग्यता-क्षमता साबित की है। देश और समाज का मान बढ़ाया है। वाराणसी के हुकुलगंज स्थित विशाल भारत संस्थान में आयोजित सामाजिक समरसता महिला सम्मेलन में ये बातें आरएसएस के केंद्रीय पदाधिकारी इंद्रेश कुमार ने ये बातें कहीं।
महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि छूआछूत की भावना इंसानियत के खिलाफ है। सम्मेलन में दलित एवं मुस्लिम महिलाओं को सम्मानित कर संदेश दिया कि उन्हें किसी जाति और धर्म में नहीं बांटा जा सकता।
इस दौरान उन्होंने तीन तलाक पीड़ित और गैर सरकारी पेंशन योजना के अंतर्गत 11 मुस्लिम महिलाओं को पेंशन पास बुक दिया गया। महिलाओं को सम्मानित करने के साथ ही उनके पांव छूकर आशीर्वाद भी लिए।
मयंक श्रीवास्तव को राष्ट्रीय समरसता पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम महिलाएं मिलकर देश में समरसता, शांति और एकता की क्रांति का सूत्रपात करेंगी। संचालन अर्चना भारतवंशी ने किया।