हरिश्चंद्र घाट पर शवों की अंत्येष्टि के लिए मनमाना पैसा मांगे जाने की शिकायतों के आधार पर डीसीपी काशी जोन के निर्देश पर इंस्पेक्टर भेलूपुर और चौधरी परिवार के सदस्यों के बीच 17 अप्रैल 2020 को बैठक हुई थी। तय हुआ था कि जो सामान्य शव आएंगे, उनकी अंत्येष्टि के लिए सात मन लकड़ी और अन्य खर्च सहित 5,000 रुपये लिए जाएंगे।
वहीं, जो शव कोरोना संक्रमित होंगे उनकी अंत्येष्टि के लिए लकड़ी और अन्य खर्च सहित 7,000 रुपये लिए जाएंगे। इसके बावजूद हरिश्चंद्र घाट पर मनमानी जारी है और लोग रोजाना परेशान होते हैं।
वाराणसी नगर निगम ने पौराणिक महत्व वाले हरिश्चंद्र घाट पर ही लकड़ी आधारित शवदाह गृह बनाने की योजना बनाई है। इसके लिए बुधवार को एक्सीएन अजय राम कर्नाटक गेस्ट हाउस के बगल में खाली पड़ी जमीन का नाप-जोख करने पहुंचे लेकिन वहां विरोध शुरू हो गया। शिवाला के पार्षद राजेश यादव चल्लू ने इसे कहीं और बनाने और सघन आबादी से दूर गंगा घाट पर ही सामने घाट व मदरवा में बनाने का सुझाव दिया है।
नगर निगम ने लकड़ी आधारित शवदाह गृह बनाने का फैसला किया है। इसके लिए फंड देने के लिए कोलकाता की हिंदुस्तान चैरिटी ट्रस्ट सामने आई है। ट्रस्ट ने 58 लाख रुपये देने की आधारिक घोषणा करते हुए जगह की उपलब्धता के लिए गत 17 मई को पत्र लिखा था।
डीएम कौशल राज शर्मा की पहल और नगर आयुक्त गौरांग राठी के निर्देश पर एक्सीएन अजय राम राजस्व विभाग के अफसरों के साथ दो दिनों की कड़ी मेहनत के बाद हरिश्चंद्र घाट स्थित कर्नाटक गेस्ट हाउस के बगल में जमीन चिन्हित कर ली। इस शवदाह गृह को बनाने के लिए ट्रस्ट ने करीब 35 फीट के वर्गाकार जमीन की मांग की है, जो यहां उपलब्ध हो जा रही है।
नाप-जोख की जानकारी होने पर मौके पर पहुंचे पार्षद राजेश चल्लू ने कहा कि पहले से ही धुएं से लोग परेशान हैं उसके बाद अब इतना धुंआ निकलेगा तो और भी यहां के स्थानीय लोगों की दिक्कत बढ़ेगी।
सतह से 25 फीट ऊंचा बनेगा
हिंदुस्तान चैरिटी ट्रस्ट ने घाट की सतह से 25 फीट ऊपर दो भट्टियों को बनाने के साथ ही प्लेटफार्म बनाने का सुझाव दिया है ताकि बरसात व गंगा में बाढ़ आने की दिशा में शवों की अंत्येष्टि में कोई दिक्कत व बाधा उत्पन्न न हो।