निगम में संविदा चालकों व परिचालकों को निलंबित करने और फिर उन्हें बहाल कराए जाने का खेल बहुत पुराना है। पुराने कर्मचारी बताते हैं कि इस समय अति हो गई है। छोटे-छोटे काम के लिए भी पैसे की मांग होती है। पानी सिर के ऊपर गया तभी मामला एंटी करप्शन तक पहुंचा। नए अधिकारी और नए बाबूओं ने हाथ में कमान आते ही रोडवेज को आरटीओ समझ लिया है। शासन स्तर से यहां के अधिकारियों और उनके बाबूओं की जांच करानी चाहिए।
एक अधिकारी के वाहन चालक पर भी आरोप
रोडवेज में एक अधिकारी का वाहन चालक भी संविदा के चालकों, परिचालकों के अलावा डग्गामार वाहनों के चालकों से पैसे वसूलता है। रात और सुबह के समय डग्गामार वाहन चालक रोडवेज परिक्षेत्र से सवारियां बैठाते हैं। इसके एवज में बड़े अधिकारी का वाहन चालक ही पैसा वसूलता है। एंटी करप्शन टीम की जांच में यह बात सामने आई है।