इससे दशाश्वमेध से लेकर अस्सी तक बालू व सिल्ट भारी मात्रा में जमा हो जाएगी। ललिता घाट के बाद वरुणा पार तक मालवीय पुल के पास कटाव होगा। ललिता घाट पर बनाया गया बांध 90 डिग्री के कोण पर बनाया गया है। इससे जो हानियां होंगी उनका अंदाजा लगाना मुश्किल है।
उन्होंने बताया कि अस्सी से दशाश्वमेध तक घाटों से खिसक जाएंगी। ललिता घाट पर जलधारा अवरुद्ध होने से दशाश्वमेध के अपस्ट्रीम में मिट्टी का जमाव होगा। ललिता घाट के बाद गंगा घाटों का नजारा बदल जाएगा। इससे मालवीय पुल के पिलर भी क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। इसका प्रभाव गंगा के 50 किलोमीटर के अप और डाउन स्ट्रीम में नजर आएगा। रामनगर किले के पास हैवी सिल्ट जमा होगी। गंगा में जल परिवहन की संभावनाओं पर भी संकट के बादल मंडराएंगे।
प्रो. यूके चौधरी ने बताया कि असि का घाट पहले गंगा असि के संगम मिट्टी का था लेकिन वहां पर मिट्टी जमा नहीं होती थी। जब असि का स्थान परिवर्तित कर दिया गया तो अस्सी घाट पर मिट्टी जमा होने लगी। वरुणा कटाव क्षेत्र को भरने वाली है। वरुणा और असि के कारण ही वाराणसी का क्षेत्र स्थिर क्षेत्र था। यहां पर ना कटाव था और ना ही मिट्टी का जमाव होता है।
गंगा घाटों का निर्माण वैज्ञानिक तरीके से किया गया था। प्रो. यूके चौधरी ने कहा कि इस परेशानी से बचने के लिए जरूरी है कि फिलहाल जो काम किया गया है उसको वहीं रोक दिया जाए। विशेषज्ञों की सलाह से इसका निर्माण किया जाए तो समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व न्यास अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा कि अपवर्ग प्रदान करने वाली मां गंगा तारक मंत्र देने वाले बाबा विश्वनाथ के गंगा तटीय मूलस्वरूप में कोई बदलाव नहीं होगा ऐसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था। इसी विश्वास पर काशीवासियों को विश्वास है। प्रधानमंत्री से निवेदन है कि वह इस पर जल्द से जल्द ध्यान दें।
संकटमोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि गंगा का वाणिज्यिक लाभ उठाने के उद्देश्य से छेड़छाड़ की जा रही है। इससे निकट भविष्य में गंभीर स्थिति उत्पन्न होगी। वह रविवार को विश्व पर्यावरण दिवस पर तुलसीघाट पर संकटमोचन फाउंडेशन की ओर से आयोजित वेबिनार को संबोधित कर रहे थे। प्रो. मिश्र ने कहा कि गंगा तट के ललिता घाट पर गंगा के अंदर एक लंबे प्लेटफार्म का निर्माण किया गया है, जिसके कारण गंगा का प्रवाह बाधित हो रहा है। इसके दुष्परिणाम भी दिख रहे हैं।
ललिता घाट के अपस्ट्रीम में शैवाल के पनपने के कारण पानी का रंग हरा हो गया है। गंगा जी में प्रचुर मात्रा में शैवाल का पाया जाना जल एवं गंगा के उपयोग करने वालों के स्वास्थ्य के लिए हितकर नहीं है। इस प्लेटफार्म की वजह से घाटों की तरफ सिल्ट का जमाव बढ़ेगा एवं गंगा घाट से दूर हो जाएंगी। गंगा जी के पूर्वी तट पर एक नहर का निर्माण भी किया जा रहा है एवं कहा जा रहा है कि इस कारण से गंगा जी के पश्चिमी तट पर पड़ने वाले जल दबाव में कमी आएगी एवं घाटों के नीचे हो रहे जल रिसाव में कमी आएगी, हालांकि इसका मुख्य उद्देश्य मालवाहक जल पोतों के आवागमन को सुचारू रूप प्रदान करना है।