वेबसाइट के जरिए ही स्कैन और डिजिटाइज्ड नक्शों की कॉपी अपलोड हो जाएगी। इसके लिए उन्हें कोई फीस भी नहीं चुकानी होगी। मौजूदा समय में खतौनी में सिर्फ गाटा संख्या, ग्राम पंचायत का कोड और जमीन के मालिकाना हक की जानकारी होती है। इसमें जमीन का पुराना ब्यौरा नहीं होने से उसका पूरा रिकार्ड पता नहीं चल पाता है।
स्टांप व निबंधन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने कहा कि हर जिले के सरकारी व निजी संपत्तियों का ब्यौरा आनलाइन किया जा रहा है। इसमें हर संपत्ति का पूरा इतिहास मौजूद रहेगा। ताकि रजिस्ट्री से पहले लोग आसानी से उसकी पड़ताल कर सके। जुलाई से इस योजना को लागू करने की तैयारी है।
दरअसल, राज्य सरकार रजिस्ट्री प्रक्रिया को सुलभ बनाने और आम लोगों की सहूलियत के लिए पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर रही है। इसमें जमीन के पुराने रिकार्ड, खसरा, खतौनी के ऑनलाइन होने के साथ ही शुल्क व रजिस्ट्री का समय भी ऑनलाइन जमा किया जा सकेगा। ऐसे में रजिस्ट्री के दौरान आने वाली अड़चनों को आनलाइन प्रक्रिया से समाप्त किया जाएगा।
- वाराणसी में प्रत्येक महीने 35 सौ पांच से हजार लोग कराते हैं संपत्तियों की रजिस्ट्री
- प्रत्येक रजिस्ट्री में पांच से 50 हजार रुपये तक कागजात जांच में होता है अतिरिक्त खर्च
- प्रत्येक महीने निबंधन कार्यालय को होती है 50 से 80 करोड़ रुपये की आय