वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में दुर्लभ पांडुलिपियों और शिल्प कला के क्षेत्र में शोध किया जाएगा। इसके साथ ही देश भर की दुर्लभ पांडुलिपियों का अन्वेषण करने के साथ ही विश्वविद्यालय में उपलब्ध एक लाख पांडुलिपियां भी इस शोध के केंद्र में होंगी। विश्वविद्यालय की ओर से इंडियन नॉलेज सिस्टम के सहयोग से 50 लाख का प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार को भेजा गया है।
कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि उच्च शिक्षा के तहत इंडियन नॉलेज सिस्टम के सहयोग से 50 लाख रुपये की परियोजना तैयार की गई है। इसके तहत विश्वविद्यालय की ओर से संस्कृत के ग्रंथों में शिल्पकला के क्षेत्र में अन्वेषण एवं पूरे भारतवर्ष में दुर्लभ पांडुलिपियों के अंदर व्याप्त 64 शिल्पकला के क्षेत्र में भी शोध होगा। इसके अलावा विश्वविद्यालय की एक लाख पांडुलिपियां भी शोध के दायरे में रहेंगे। शोध कार्य के अलावा पांडुलिपियों का हिंदी में भी अनुवाद कराया जाएगा। इंडियन नॉलेज सिस्टम के तहत गुरुकुल पद्धति से चार पाठ्यक्रमों का अध्ययन अध्यापन कराया जाएगा। इसके तहत वैशेषिक शास्त्र, योग शास्त्र, गणित शास्त्र एवं आयुर्वेदिक शास्त्र पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए पाठ्यक्रम तैयार कराया जा रहा है।