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शोध : कीमोथेरेपी से होने वाले दर्द से मिलेगी राहत

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कैंसर के मरीजों को अब कीमोथेरेपी में होने वाले दर्द से राहत मिलेगी। बीएचयू के वैज्ञानिकों ने अनुवांशिक जीन को नियंत्रित करने के लिए एक नया तरीका विकसित किया है। आईएमएस और आईआईटी के संयुक्त शोध में उत्साहजनक परिणाम आए हैं। आमतौर पर कैंसर के मरीजों को कीमोथेरेपी के समय बहुत दर्द झेलना पड़ता है। यही नहीं इसके बहुत सारे साइड इफेक्ट्स भी होते हैं। तंत्रिकाओं का दर्द सबसे ज्यादा परेशान करने वाला होता है। शोध में कीमोथेरेपी के बाद लगभग 68.1 प्रतिशत लोगों को तंत्रिकाओं में दर्द की शिकायत मिली। दर्द कम करने वाली दवाओं का भी खास असर नहीं होता है। आईएमएस बीएचयू एनेस्थीजियोलॉजी विभाग की डॉ. निमिषा वर्मा और आईआईटी बीएचयू फार्मास्यूटिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. विनोद तिवारी और उनकी टीम ने शोध में अनुवांशिक जीन टीआरपीवी-1 एसआईआरएनए फार्मूलेशन की योजना सुझाई है। बताया कि इससे कीमोथेरेपी से होने वाले दर्द को बिना किसी साइड इफेक्ट्स के नियंत्रित किया जा सकता है। यह प्रयोग जनवरी 2022 में एक वैश्विक प्रतिष्ठित जनरल (लाइफ साइंस) में प्रकाशित हो चुका है।
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क्या है टीआरपीवी
टीआरपीवी-1 एक प्रकार का जीन है। इसके व्यवहार में बढ़ोतरी की वजह से दर्द होता है। आनुवंशिक चिकित्सा की मदद से जीन की बढ़ोतरी को कम किया जा सकता है। शोध में पाया गया कि एसआईआरएनए एक आनुवंशिक साधन है। जो कि इस जीन को शांत कर सकता है और दर्द के निवारण में काम आ सकता है।
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