कोरोना की पहली और दूसरी लहर में एक समय ऐसा था जब एक दिन में 1000 से 1500 केस मिल रहे थे। लोगों का घरों से निकलने पर पाबंदी लगा दी गई। उस समय स्वास्थ्यकर्मी ही थे जो घरवालों की परवाह किए बिना सेवा को मिशन के रूप में काम करते रहे। सीएमओ कार्यालय में तैनात कर्मचारी संजय साहू इनमें से एक हैं।
तीसरी लहर में भी वह पूरी सजगता से डयूटी में लगे हैं। दूसरी लहर में ड्यूटी के दौरान ही संजय न जाने कैसे संक्रमित हो गए, कामकाज के दौरान पता नहीं चला। यहीं नहीं होम आइसोलेशन में रहने के दौरान तबीयत बिगड़ गई तो दीनदयाल अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। अपने छह साल के बेटे प्रांजल और पत्नी प्रीति को गांव में छोड़कर अपना फर्ज निभाते रहे। ठीक होकर लौटने के बाद अब भी वह सेवा को मिशन के रुप में मानते हुए काम में लगे हैं।
कोरोना संक्रमण की जंग में चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों के साथ ही पुलिसकर्मियों ने भी एक योद्धा की तरह अपनी जिम्मेदारी निभाई। पहली और दूसरी लहर की तरह की तीसरी लहर में भी कई पुलिसकर्मी संक्रमित हुए हैं। इसमें से एक अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था अनिल कुमार सिंह हैं।
कमिश्नरेट की कानून व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के दौरान वे संक्रमित हुए लेकिन कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए खुद को होम आइसोलेट किया और कानून व्यवस्था में किसी भी तरह की कोई ढील नहीं आने दी।
फोन पर और वर्चुअल तरीके से घर से ही कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अपने मातहतों संग जुड़े हुए थे। उन्हें समय-समय पर फोन से गाइड करते रहे और इस तरह अपने फर्ज और कर्तव्य को भी निभाया। होम आइसोलेट होते हुए भी कमिश्नरेट की कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी बखूबी निभाई।