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रीजनल कॉन्क्लेव 2024: ग्रीन बिल्डिंग के रूप में बनाया रुद्राक्ष, स्मार्ट सिटी को मिला गृहा पुरस्कार

Fri, 21 Jun 2024 02:33 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

रीजनल कॉन्क्लेव 2024 में प्रमुख सचिव ने वाराणसी स्मार्ट सिटी के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. डी वासुदेवन को गृहा पुरस्कार देकर सम्मानित किया। 
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गृहा पुरस्कार से स्मार्ट सिटी सम्मानित - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गृहा रीजनल कॉन्क्लेव 2024 में स्मार्ट सिटी को रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलन केंद्र का निर्माण ग्रीन बिल्डिंग के रूप में करने पर गृहा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में यह पुरस्कार नगर विकास के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात और गृहा काउंसिल के सीईओ संजय सेठ ने वाराणसी स्मार्ट सिटी के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. डी वासुदेवन को दिया।

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यह पुरस्कार राष्ट्रीय पहल पर्यावरण के अनुकूल इमारतों के विकास के लिए नवाचार दृष्टिकोण को बढ़ावा देने पर मिला है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से ग्रीन बिल्डिंग रेटिंग, ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटेट असेसमेंट (गृहा) की ओर से निर्धारित राष्ट्रीय मानदंडों के आधार पर नए निर्माणों को दिया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य कार्बन फुटप्रिंट को कम करना, निर्माण के दौरान ऊर्जा और पानी की खपत को न्यूनतम करना, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों को अपनाना और परियोजनाओं की संचालन लागत में 30-40 प्रतिशत की कटौती करना शामिल है।

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रुद्राक्ष अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सम्मेलन केंद्र को एक ग्रीन बिल्डिंग के रूप में स्थापित करने के लिए कई प्रयास किए गए हैं। रुद्राक्ष कंवेंशन सेंटर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 जुलाई 2021 को किया था। इसमें 1200 सीटों वाला ऑडिटोरियम, मीटिंग हॉल, रेक्रियेशनल एरिया और अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसका निर्माण जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जायका) सहायता से किया गया था। जिसमें जापानी सलाहकार और कार्यदायी संस्थाएं सम्मिलित थीं। इसके संचालन, प्रबंधन एवं रखरखाव वाराणसी स्मार्ट सिटी से किया जा रहा है।
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ग्रीन बिल्डिंग बनाने के लिए किए गए प्रयास

  • पानी बचाने के लिए कम-प्रवाह वाले इनडोर फिटिंग्स की स्थापना
  • पानी की खपत की निगरानी और खर्च की पहचान के लिए बिल्डिंग प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से डिजिटल सब-मीटरिंग
  • साइट पर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग पॉइंट्स का प्रावधान
  • 1,40,000 किलोवॉट वार्षिक उत्पादन क्षमता वाले सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना
  • शीतलन आवश्यकताओं को कम करने के लिए डबल-ग्लेज़्ड दीवारों के साथ अत्यधिक इंसुलेटेड निर्माण तकनीक का उपयोग
  • दीवारों के लिए ऑटोक्लेव्ड एरेटेड कंक्रीट (एएसी) ब्लॉक्स का उपयोग
  • केंद्रीकृत कचरा संग्रहण प्रणाली का कार्यान्वयन
  • दिव्यांगजनों के अनुकूल और सुलभ भवन डिजाइन
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