ज्यादातर हत्याओं के पीछे संपत्ति का विवाद रहा। इन विवादों के निस्तारण में पुलिस का रवैया निराशाजनक रहा है। अशोक कुमार के कार्यकाल में लूट की भी कई बड़ी वारदातें हुईं तो पुलिस पर हमले के मामले भी बढ़ें। जनता से जुड़ने की बजाय दूरी बनाए रखी।
यानी कि थाना स्तर पर भी पुलिस और जनता की दूरी बढ़ती गई। जनप्रतिनिधि भी उनके रवैये को लेकर नाराज थे। जफराबाद विधायक डॉ हरेंद्र प्रसाद सिंह तो कई बार शासन में शिकायत कर चुके थे। मड़ियाहूं के इटाए की घटना के बाद भी वह नाराजगी जताने एसपी आफिस तक पहुंच गए थे।
रविवार को जिले में आए प्रदेश महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल से भी इसकी शिकायत हुई थी। वैसे उनके तबादले का एक अन्य कारण फरवरी 2021 में सेवानिवृत्ति को भी बताया जा रहा है। एसपी के करीबियों का कहना है कि सेवानिवृत में छह माह से भी कम समय होने के कारण उन्हें लखनऊ में पोस्टिंग दी गई है।
अशोक कुमार पिछले दो वर्ष में पहले कप्तान रहे, जिन्होंने दस माह का कार्यकाल पूरा किया। इनके पहले रवि शंकर छवि, दिनेश पाल सहित चार कप्तानों का 14 महीने में ही ट्रांसफर हो गया था।