काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी के अनुसार मकर संक्रांति पर रवि योग, अमृत काल और अभिजीत मुहूर्त का निर्माण हो रहा है। मकर संक्रांति का पुण्य काल सुबह 7:15 बजे से शाम 5:46 बजे तक रहेगा। महापुण्य काल सुबह 7:15 बजे से सुबह नौ बजे तक रहेगा।
मकर संक्रांति पर सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही खरमास का समापन होगा। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। खास बात यह है कि मकर संक्रांति का पुण्य काल 10 घंटे 31 मिनट और महापुण्य काल एक घंटा 45 मिनट का होगा। संक्रांति तिथि पर पूर्वजों के तर्पण और पिंडदान का भी विधान है।
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काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी के अनुसार मकर संक्रांति पर रवि योग, अमृत काल और अभिजीत मुहूर्त का निर्माण हो रहा है। मकर संक्रांति का पुण्य काल सुबह 7:15 बजे से शाम 5:46 बजे तक रहेगा। महापुण्य काल सुबह 7:15 बजे से सुबह नौ बजे तक रहेगा। इस दौरान स्नान, पूजा, जप-तप और दान-पुण्य का विधान है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:09 बजे से 12:51 बजे तक रहेगा। रवि योग का निर्माण सुबह 7:15 बजे से लेकर 8:07 बजे तक होगा। इस दौरान अमृत काल रात 10:49 बजे से 12:17 बजे तक रहेगा। इसके साथ ही खरमास का समापन हो जाएगा और मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी। इसके अलावा बव और बालव करण दोपहर 3:35 बजे तक रहेगा।
भगवान विष्णु के साथ होगी महादेव व मां दुर्गा की पूजा
मकर संक्रांति पर भगवान विष्णु के साथ ही महादेव और मां दुर्गा की पूजा का भी विधान है। भगवान शिव के साथ मां दुर्गा विराजमान रहेंगी। इस दौरान साधक भगवान शिव का रुद्राभिषेक कर सकते हैं। मान्यता है कि मां गौरी के साथ भगवान शिव के वास के समय रुद्राभिषेक करने से साधक के घर में सुख और समृद्धि आती है।