पूर्णिमा के साथ ही ज्येष्ठ माह का समापन हो जाएगा और प्रतिपदा से आषाढ़ की शुरुआत हो जाएगा। इसी महीने में रथयात्रा मेले के साथ काश्नाी के लक्खा मेलों की शृंखला भी शुरू हो जाएगी जो नाग नथैया तक अनवरत चलेगी। काशी के पंचांगों के अनुसार आषाढ़ मास की शुरुआत 23 जून से हो जाएगी और समापन 21 जुलाई को होगा। इसके बाद सावन मास शुरू होगा। आषाढ़ मास में जप, तीर्थ यात्रा करने से कभी न खत्म होने वाला पुण्य मिलता है।
आषाढ़ के महीने की शुरुआत भगवान जगन्नाथ की जलयात्रा और मां कामाख्या के आंबुवाची योगपर्व से हो रही है। इसके साथ ही योगिनी एकादशी और गुप्त नवरात्रि का भी संयोग रहेगा।
काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी के अनुसार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 22 जून को सुबह 6:39 बजे से प्रारंभ होकर 23 जून को सुबह 5:18 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार आषाढ़ मास का आरंभ 23 जून से होगा। सर्वार्थ सिद्धि योग और त्रिपुष्कर योग की स्थापना भी इसी दिन हुई थी।
आषाढ़ महीने को मनोकामना पूर्ति के लिए सर्वोत्तम माह माना जाता है। इस महीने पौराणिक महत्व के मंदिरों और प्राचीन तीर्थों के दर्शन करने चाहिए। आषाढ़ माह की देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाएंगे। आषाढ़ माह में गुप्त नवरात्रि के दौरान देवी की पूजा करने से समस्याओं से मुक्ति मिलती है।