वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार का एकादशी व्रत 20 मार्च को पुष्य नक्षत्र में रखा जाएगा। व्रत का पारण अगले दिन यानी 21 मार्च को दोपहर 1ः31 बजे से शाम 4ः07 बजे तक किया जा सकता है। पूजा का शुभ मुहूर्त 20 मार्च को सुबह 6ः25 बजे से सुबह 9ः27 बजे तक है।
आंवले की पेड़ की पूजा के साथ ही मां अन्नपूर्णा के दर्शन का विधान
ज्योतिषाचार्य विमल जैन के अनुसार रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु और आंवले के पेड़ की भी पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि आंवले के वृक्ष में त्रिदेव का वास माना गया है। ब्रह्माजी वृक्ष के ऊपरी भाग, शिवजी मध्य और भगवान विष्णु वृक्ष की जड़ में निवास करते हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार पूर्वाभिमुख होकर आंवले के वृक्ष का पूजन करना चाहिए।
पूजन के पश्चात वृक्ष की आरती और परिक्रमा फलदायी होती है। भगवान श्रीविष्णु की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए रात्रि जागरण करके उनके मंत्र का जाप करें। इस दिन मां अन्नपूर्णा की सोने या चांदी की मूर्ति के दर्शन करने का भी विधान है।
पूजा विधि
- रंगभरी एकादशी के दिन स्नान कर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का संकल्प लें।
- इसके बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करें और पार्वती जी का सोलह शृंगार करें।
- शिवलिंग पर गुलाल, चंदन और बेलपत्र अर्पित करें।
- इसके बाद कथा और आरती कर विधि विधान से पूजा करें।
- भोग लगाकर पूजा का समापन करें और सुख-शांति की प्रार्थना करें।