राबर्ट्सगंज लोकसभा सीट से चुने गए सांसदों के साथ एक अनूठा संयोग रहा है। यहां अब तक 18 बार लोकसभा के चुनाव हो चुके हैं। जिसमें 12 बार राम, शिव और नारायण नाम वाले उम्मीदवारों को जीत मिली है। इसमें भी अकेले नौ बार सिर्फ राम नाम की जय रही।
छह चुनावों में दूसरे उम्मीदवार जीते, मगर उनमें से भी पांच के नाम में एक जैसा मेल रहा। पहले चुनाव से लेकर पिछले चुनाव तक यह संयोग बरकरार है। भौगोलिक रूप से यूपी के सबसे बड़े चुनावी क्षेत्र सोनभद्र में पहला चुनाव 1952 में हुआ था। तब यहां एक सीट से दो उम्मीदवार चुने जाते थे।
एक सामान्य वर्ग तो दूसरा अनुसूचित जाति से। राबर्ट्सगंज सीट शुरू से ही सुरक्षित रही है। यहां पहले सांसद रूप नारायण चुने गए थे। वह लगातार दो बार जीते। वर्ष 1962 में हुए तीसरे चुनाव में राम स्वरूप को जीत मिली। इन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जीत की हैट्रिक लगाई।
आपातकाल के बाद साल 1977 में हुए आम चुनाव में यह सीट भारतीय लोकदल के खाते में चली गई। तब इस सीट पर शिव संपत राम निर्वाचित हुए। तीन साल बाद हुए अगले चुनाव में फिर से कांग्रेस ने जीत के साथ वापसी की और राम प्यारे पनिका सांसद बने।
वह 80 से 89 तक दो बार सांसद चुने गए। इस दौरान प्रदेश में राम मंदिर आंदोलन ने जोर पकड़ा तो सीट फिर कांग्रेस के हाथ से फिसल गई और भाजपा के सूबेदार प्रसाद सांसद चुने गए, मगर वह दो साल ही सांसद रह सके।
2004 के बाद सिर्फ लाल ही लाल
वर्ष 2004 से लाल नाम वालों का प्रभाव रहा है। 2004 में बसपा से लालचंद कोल जीते तो मध्यावधि चुनाव में भाईलाल कोल को जीत मिली। इसके बाद 2009 में पकौड़ी लाल और 2014 में छोटेलाल खरवार सांसद चुने गए। वर्तमान में अपना दल- एस से पकौड़ी लाल सांसद हैं।
राबर्ट्सगंज से चुने गए सांसद
वर्ष सांसद पार्टी
1952 रूप नारायण कांग्रेस
1957 रूप नारायण कांग्रेस
1962 राम स्वरूप कांग्रेस
1967 राम स्वरूप कांग्रेस
1972 राम स्वरूप कांग्रेस
1977 शिव संपत राम भालोद
1980 रामप्यारे पनिका कांग्रेस
1984 रामप्यारे पनिका कांग्रेस
1989 सूबेदार भाजपा
1991 राम निहोर जनता दल
1996 राम सकल भाजपा
1998 राम सकल भाजपा
1999 राम सकल भाजपा