रामनगर दुर्ग में परंपरागत ढंग से मनी विजयादशमी
रामनगर दुर्ग में मंगलवार को विजयादशमी का पर्व राजसी शानो-शौकत व परंपरागत ढंग से मनाया गया। परंपरा के अनुसार अनंत नारायण सिंह दशमी तिथि लगने पर पूजन पर बैठे। चारों वेदों के चार विद्वान ब्राह्मणों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने विधि विधान से शस्त्र पूजा की।पूजन के पश्चात 36वीं वाहिनीं पीएसी के जवानों ने सलामी दी। तत्पश्चात अनंत नारायण सिंह का शाही दरबार लगा।जहां दरबार से जुड़े मुसाहिबों ने उनको नजर पेश किया। राज परिवार से जुड़ी महिलाओं ने उनकी नजर उतारी। उसके बाद दुर्ग में स्थित मंदिरों में दर्शन के बाद शाम लगभग 5.17 बजे दुर्ग से सुसज्जित हाथियों पर पूरी शानो-शौकत के साथ राजशी पोशाक में अनंत नारायण सिंह की सवारी निकली। सवारी के दुर्ग के बाहर आते ही उपस्थित जन समुदाय ने हर हर महादेव का उद्घोष कर उनका अभिनंदन किया।अनंत नारायण सिंह ने भी हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। शाही सवारी बटाऊ वीर पहुंचने पर अनंत नारायण सिंह ने परंपरा के अनुसार शमी वृक्ष का पूजन व परिक्रमा किया।
रामनगर में होता है रावण का अंतिम संस्कार
देशभर में दशहरे पर रावण का पुतला जलाया जाता है लेकिन रामनगर में बकायदा रावण का अंतिम संस्कार होता है। रामलीला में चूंकि सारा कुछ मानस पर आधारित होता है इसलिए प्रसंग के मुताबिक विभीषण और रावण के कुछ परिजन आग लेकर रावण के पुतले के पांच चक्कर लगाते हैं।विभीषण ही रावण के खानदान के एकलौते चिराग बच गए होते हैं इसलिए वहीं रावण को मुखाग्नि देते हैं।