रामनगर की रामलीला का छठा दिन
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भगवान शिव ने सीता राम के विवाह को जगत के लिए कल्याणकारी बताया। देवता श्री राम की जय-जयकार करने लगे। मंडप में सभी अपने आसन पर बैठते हैं। विवाह आरंभ हुआ, शंखोच्चार के बाद कन्यादान व सिंदूरदान पूर्ण हुआ। वशिष्ठ की आज्ञा से मांडवी, उर्मिला एवं श्रुतिकीर्ति का भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न के साथ विवाह हुआ।
दशरथ बहुओं सहित पुत्रों को देखकर बड़े प्रसन्न होते हैं। राजा जनक दशरथ से कहते हैं कि हम सब प्रकार से संतुष्ट हैं। सखियां दूल्हा दुल्हन को कोहबर में ले जाती हैं और वहां राम की आरती उतारती हैं। अंत में वर को जनवासे में भेज दिया जाता है। देवता लोग जय जयकार करते हैं जनकपुर में विवाह के बाद लीला को विराम दिया गया।