रामनगर की रामलीला का 8वां दिन
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जाल्हूपुर के टूड़ी नगर की रामलीला में गुरुवार को राज्याभिषेक और कैकेयी के कोपभवन की लीला हुई। प्रसंगानुसार राजा दशरथ राम को अयोध्या का उत्तराधिकारी बनाने का निर्णय लेते हैं। राम के राजतिलक की तैयारी शुरू होती है। यह देखकर देवताओं में खलबली मच जाती है। सभी देवता आनन-फानन में मां सरस्वती के पास पहुंचकर उनसे निवेदन करते हैं कि कुछ ऐसा उपाय करें, जिससे राम राजपाट छोड़कर वन चले जाएं। वे जिस कार्य के लिए धरती पर अवतार लिए हैं वह पूरा हो सके।
देवताओं की बात सुनकर माता सरस्वती कैकेयी की दासी मंथरा की बुद्धि फेर देती हैं। मंथरा कैकेयी को ऐसा गुमराह करती है कि वह कोपभवन में पहुंच जाती हैं। राजा दशरथ उन्हें मनाने जाते हैं। कैकेयी उन्हें वरदान की बात याद कराते हुए राम को 14 वर्ष का वनवास व भरत को राजगद्दी की मांग करती हैं। यह सुनकर राजा दशरथ जमीन पर गिर पड़ते हैं। इसके बाद श्रीराम सहर्ष वन जाने को तैयार हो जाते हैं। आरती के बाद रामलीला समाप्त हो जाती है।