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रामनगर की रामलीला : असत्य पर सत्य की जीत के लिए शुरू हुआ युद्ध, लक्ष्मण मूर्छित; संजीवनी लेकर आए हनुमान

Wed, 09 Oct 2024 03:49 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News : रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला देखने के लिए भक्त देश ही नहीं विदेशों से भी आते हैं। परंपरा के अनुसार बहुत ही सादगी से लीला का मंचन किया जाता है। झालरों और लाइटों का तामझाम नहीं रहता। आज भी लालटेन की रौशनी में रामलीला का संपूर्ण आयोजन होता है।
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रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला के मंचन से पूर्व। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रावण अहंकार में डूबा था। युद्ध टालने का श्रीराम का आखिरी प्रयास भी जब असफल रहा तो एक ही विकल्प बचा। वह युद्ध जो धर्म की अधर्म पर श्रेष्ठता के लिए और सत्य की असत्य पर विजय के लिए लड़ा जाना था।

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22वें दिन की रामलीला में मंगलवार को श्रीराम लंका के चारों द्वारों को घेरने के लिए जामवंत को रणनीति बनाने को कहते हैं। राम की सेना लंका के चारों द्वार को घेर लेती है। दोनों सेनाओं में युद्ध शुरू होता है।  

लंका में हाहाकार मचने पर मेघनाथ रणभूमि पहुंचता है। लक्ष्मण युद्ध करने आते हैं तब मेघनाद अपनी ब्रह्मशक्ति का इस्तेमाल कर लक्ष्मण को मूर्छित कर देता है। राम की सेना में शोक फैल जाता है। सुषेन वैद्य के कहने पर हनुमान धौलगिरी पर्वत पर मिलने वाली संजीवनी बूटी लेने जाते हैं। बूटी न पहचान पाने के कारण पूरा पहाड़ ही उखाड़ लाते हैं। 
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अयोध्या के ऊपर से गुजरते समय भरत उन्हें राक्षस समझकर बाण मार नीचे गिरा देते हैं। हनुमान के मुंह से राम राम सुनकर भरत को पश्चाताप होता है। इधर, लक्ष्मण के वियोग में श्रीराम विलाप करते हैं, तभी हनुमान जी वहां पहुंच जाते हैं। संजीवनी बूटी से सुषेण वैद्य लक्ष्मण की मूर्छा समाप्त कर देते हैं। लक्ष्मण उठ कर श्रीराम के गले लग जाते हैं। उधर, जाल्हूपुर की रामलीला में चारों फाटक की लडा़ई, लक्ष्मण पर शक्ति का प्रयोग व प्रतिकार की लीला हुई।

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रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला में पूजन करते पुरोहित। - फोटो : अमर उजाला
रामलीला में आज
  • रामनगर: कुंभकरण व मेघनाथ युद्ध, यज्ञ और वध।
  • शिवपुर: हनुमान जानकी मिलन, लंका दहन, प्रत्यागमन
  • जाल्हूपुर: कुंभकरण युद्ध और वध।
  • फुलवरिया: सुतीक्षण अगस्त मिलन, पंचवटी पयान, नक्कटैया, खर-दूषण वध, सीताहरण।
  • औरंगाबाद: सीता जी का समाचार राज जी कहना, रघुनाथ जी का समुद्र तट पर आना।
  • लाटभैरव: बालि-सुग्रीव युद्ध, बालि वध, सीता की खोज के लिए प्रस्थान।
  • चित्रकूट: अंगद विस्तार, कुंभकर्ण-मेघनाद वध।
  • तुलसीघाट: शबरी-मिलन, सुग्रीव-मित्रता, बालि वध।
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