दशाश्वमेध से लगे त्रिपुरा भैरवी मोहल्ले में राम रमापति बैंक की ड्योढ़ी पर सुबह छह बजे से ही शहनाई की मंगल ध्वनि गूंजने लगी। सुबह सात बजे मंगला आरती के साथ ही रामनाम की जमा पूंजी भक्तों के दर्शन के लिए खोल दी गई। पोथियों में बांध कर सजाए गए और बैंक के विभिन्न कमरों में रैक में रखे गए करीब 20 अरब रामनाम की परिक्रमा शुरू हो गई। राम नाम और सवा करोड़ शिव नाम की अपूर्व झांकी का दर्शन कर लोग निहाल हो उठे। सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। रामनाम की परिक्रमा कर पुण्य बटोरने के लिए शहर के अलावा कई प्रदेशों के दर्शनार्थी भी पहुंचे।
राम रमापति बैंक में पहुंचे श्रद्धालु
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ऐसा मानना है कि राम रमापति बैंक से कर्ज लेकर पूरा भरने वाले भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। भक्त यहां से सवा लाख राम नाम का कर्ज राम नवमी के अवसर पर लेते हैं फिर अगले रामनवमी पर सवा लाख राम नाम लिख कर यहां जमा कर देते हैं। इसके लिए राम बैंक का मोहर लगा कागज, लकड़ी की कलम और लाल स्याही बैंक की तरफ से मुफ्त में दिया जाता है। इस बैंक में स्त्री हो या पुरुष, सभी लाभ उठाते हैं। इस बैंक में कोई भी आकर अपने दुख दूर करने के लिए 'राम नाम' का कर्ज ले सकता है।
यहां खाता खुलवाना आसान नहीं है, क्योंकि इसके लिए अचार विचार और इनके अपने नियम है। जिसे पूरा करने का वचन देने वाले को ही यहां से राम नाम लिखने का कागज़ मिलता है और उसी पर इन्हें लिखना होता है। यहां से कर्ज उन्हीं भक्तों को दिया जाता है जो बहुत दुखी, दीन, अभिमान रहित होकर श्री रामलला जी के शरण में आते हैं। राम रमापति बैंक से राम नाम का कर्ज़ लेने वालों के लिए कुछ नियम हैं, जिसमें शराब, मांस, मछली,प्याज, लहसुन इत्यादि चीजों को नहीं खाना है।