टीम की अगुवाई करने वाले डॉ मारुति नंदन तिवारी का कहना है कि मंदिर के द्वार पर लगी गंगा और यमुना की मूर्तियां शास्त्र सम्मत हैं। दाईं तरफ गंगा और बाईं तरफ यमुना की प्रतिमा लगवाने का सुझाव दिया गया था। ऐसी ही मूर्तियां देश के दूसरे मंदिरों में लगी हैं।
डॉ. शांति स्वरूप सिन्हा का कहना है कि मूर्तियों के अध्ययन में प्रतिमा विज्ञान यानी आइकोनोग्राफी की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्रो. तिवारी के निर्देशन में चल रहे इस सेवा कार्य
में बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है। अध्ययन का यह काम अभी जारी है।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष को दी रिपोर्ट
प्रो. मारुतिनंदन ने बताया कि तीन महीने पहले ही मूर्तियों को प्रमाणित करने की जिम्मेदारी मिली है। इसकी रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष को दी गई है। इसमें करीब एक हजार मूर्तियों का ब्योरा है। एक-एक मूर्तियों को लगाने का बारीकी से अध्ययन कर उसका जिक्र किया गया है। राम से जुड़े विग्रहों के शास्त्र सम्मत और प्रवेश द्वार पर नवग्रह का अंकन करने संबंधी सुझाव दिए गए। मंदिर के बाहर लगने वाली देव मूर्तियों के क्रम, स्थान विशेष के अंकन सहित अन्य जगहों पर जो कुछ भी प्रतिमा विज्ञान के अनुसार सही है, उसका सुझाव भी शामिल किया गया है।