वाराणसी में आयोजित राजभाषा विभाग गृह मंत्रालय की ओर से दो दिवसीय अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के अंतिम दिन गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा समेत अन्य लोगों ने मुंशी प्रेमचंद के गांव लमही पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। अजय मिश्रा ने मुंशी जी के आवास और परिसर का भ्रमण कर जायजा लिया। कहा कि मुंशी जी की कृतियां आज भी प्रेरक और पथ-प्रदर्शक हैं। उनकी रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं। मुंशी प्रेमचंद ने ऐसी कृतियों की रचना की, जिसने हर वर्ग का प्रतिनिधित्व किया।
इधर, ट्रेड फैसिलिटी सेंटर बड़ालालपुर में आयोजित राजभाषा सम्मेलन में वक्ताओं ने हिंदी के विकास, उसके प्रचार-प्रसार और लोकप्रियता पर विस्तार से चर्चा की। समापन समारोह में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं के साथ ही हिंदी का विकास संभव है। ऐसा इसलिए क्योंकि सभी क्षेत्रीय भाषाओं का जुड़ाव हिंदी से ही है। इस दिशा मे एकजुटता के साथ काम करने की जरूरत है।
भारतीय संस्कृति में सर्वे भवंतु सुखिन: की बात
गृह राज्यमंत्री ने कहा कि सम्मेलन में राजभाषा विभाग सहित अन्य कार्यालयों से जुड़े लोगों की भारी संख्या में प्रतिभागिता हिंदी के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। भारतीय संस्कृति में लोग दबाव या घृणा की बात नहीं करते, सर्वे भवंतु सुखिन: की बात करते हैं।
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