कानपुर में रहने वाले अपने बेटी-दामाद और नातिन के नाम संपत्ति करने पर मार्तंड शाही तैयार हुए तो उन्हें आरोपियों ने धोखे से कानपुर ले जाकर नौबस्ता थाना क्षेत्र में हत्या कर शव फेंक दिया और मकान पर कब्जा कर लिया था।
आठ अगस्त 2021 को शव मिलने के बाद गाजियाबाद में नौकरी करने वाले बेटे अमित शाही ने कैंट थाने में सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या, अगवा सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया। इसी बीच एडीसीपी वरुणा प्रबल प्रताप सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया और मामले की तह तक पहुंची।
पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने बताया कि हत्या से जुड़ आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य इकट्ठा करने के लिए पुलिस को 1345 पन्नों के काल डिटेल रिकार्ड का आंकलन करना पड़ा। बनारस से कानपुर तक 63 गवाहों से पूछताछ की गई। मार्तंड शाही के जेब से मिले रोडवेज बस टिकट और नशीली दवा आदि बरामद हुआ तो उसकी तहकीकात की गई।
जिस बस का टिकट कराया गया था, उस बस के चालक-परिचालक और वर्कशाप में खड़ी बस के कर्मचारियों से पूछताछ की गई तो मालूम चला कि बस में मार्तंड शाही सफर किए ही नहीं। सुसाइड नोट भी फर्जी पाया गया।
वहीं बनारस से कानपुर तक टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज में आरोपियों की पहचान उजागर हुई। आरोपियों के मोबाइल से मिले फोटो-वीडियो और घटना से पहले व बाद में मोबाइल से हुई उनकी बातचीत एक ठोस साक्ष्य है। पुलिस ने अगस्त और सितंबर माह में आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश के अनुसार मुकदमा दर्ज होने के बाद जब मार्तंड शाही के मोबाइल को खंगाला गया तो उसमें सबसे अधिक बातचीत आरोपी दंपती राजेश चौहान और कंचन चौहान ने की थी। इस पर इनके मोबाइल के सीडीआर को खंगाला गया तो एक के बाद एक कुल आठ आरोपी और सामने आए।