डीआरएम कार्यालय वाराणसी
- फोटो : अमर उजाला
16 सितंबर 2022 को सीबीआई की टीम ने बरेका के सीनियर सिविल इंजीनियर ओमप्रकाश सोनकर को तीन लाख रुपये घूस लेते हुए गिरफ्तार किया था। मंगलवार को डीआरएम बिल्डिंग में सीबीआई की कार्रवाई के बीच बरेका प्रकरण भी रेलकर्मियों के जेहन में ताजा हो गई।
राणा नगर काॅलोनी निवासी ओमप्रकाश सोनकर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। ओमप्रकाश पर भी रेलवे के ठेकेदार से घूस लेने का आरोप लगा था। आरोप था कि बिल पास करने के लिए पैसे की मांग की जा रही है।इस बार भी रेलवे ठेकेदार की शिकायत पर ही सीनियर डीईएन टू सत्यम कुमार सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
डीआरएम कार्यालय वाराणसी
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इंडियन रेलवे सर्विस इंजीनियरिंग 2006 बैच के अफसर सत्यम कुमार सिंह की गिरफ्तारी से डीआरएम भवन के अधिकतर अधिकारियों और कर्मचारियों में हर्ष जैसा माहौल है। वहीं, कुछ अधिकारी इसे साजिश करार दे रहे हैं। कुछ कर्मियों ने बताया कि सीनियर डीईएन अपने साथ निजी अंगरक्षक लेकर चलता था। एक अलग ही रूतबे और प्रभाव से रहता था। उच्चाधिकारियों के आदेशों को कई बार दरकिनार कर चुका है। औड़िहार से छपरा तक रेलवे ट्रैक और भवनों की मरम्मत का काम सीनियर डीईएन ही देखता था।
इससे पहले रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) में तैनात था। डेढ़ साल पहले ही वह पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल में सीनियर डीईएन टू के पोस्ट पर तैनात हुआ था। गोरखपुर की एक फर्म को सबसे ज्यादा काम देने का आरोप भी सीनियर डीईएन पर लगा है। सीबीआई की जांच में यह बात भी सामने आई है। अपने रिश्तेदारों और उनके करीबियों के फर्म को बड़ा काम दिया गया।
डीआरएम भवन में इंजीनियरिंग के एक और अधिकारी की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। अधिकारी के इशारे पर ही सत्यम कुमार सिंह बिल पास करता और रोकता था। उसके रिश्तेदारों और उनके करीबियों के फर्म को ही अधिकतर काम दिए जाते थे। इसकी भी जांच शुरू हो चुकी है।