पिछले वर्षों भाजपा को संसद में जिस आवाज से सबसे ज्यादा डर लगता था, अब संसद में फिलहाल के लिए उस आवाज को खामोश करा दिया गया है। लेकिन याद रहे कि अब सड़कों पर इंकलाब का सैलाब आएगा। राहुल गांधी को खामोश करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।
हम कानूनी और राजनीतिक दोनों तरह से इस लड़ाई को लड़ेंगे। हम डरने या चुप रहने वाले नहीं हैं। राहुल गांधी सच के सिपाही हैं और सच कहने के लिए माफी नहीं मांगी बल्कि सजा को चुना। सत्य के प्रहरी के समर्थन में हर कार्यकर्ता आखिरी सांस तक खड़ा रहेगा।