बीएचयू के पूर्व विशेष कार्याधिकारी डॉ. विश्वनाथ पांडेय ने बताया कि विश्वविद्यालय से हिंदू नाम हटाने का विरोध छात्रनेताओं ने भी किया। सड़क पर मोर्चा बीएचयू के देवव्रत मजूमदार और अन्य छात्र नेताओं ने संभाल रखा था। हिंदू शब्द हटाने का विरोध होने के साथ ही अंग्रेजी हटाओ की भी वकालत की गई। इसे लेकर बीएचयू में बहुत बड़ा आंदोलन किया गया। तब जाकर संसद से इस विधेयक को वापस लिया गया। संस्थापक महामना पं. मदन मोहन मालवीय और काशीराज प्रभु नारायण सिंह ने 1905 में टाउनहॉल में हुई बैठक के दौरान काशी हिंदू विश्वविद्यालय का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। महामना को मैकाले की वह बात भी काफी चोट पहुंचाती थी कि भारत के पास एक आलमारी से ज्यादा साहित्य नहीं है।