बिरजू को नृत्य सिखाने के लिए उनके पिता पंडित अच्छन महाराज ने उनसे एक दिन 500 रुपये मांग लिए। यह राशि घराने की धरोहर प्राप्त करने के लिए थी। जब गंडा बांधने का समय आया तो अच्छन महाराज अपनी पत्नि से बोले कि जब तक तुम्हारा लड़का नजराना नहीं देगा तब तक गंडा नहीं बांधूगा। इसके बिना कोई भी विद्या पूरी नहीं होती।
बिरजू महराज ने इस पेशकश के बाद डांस के दो प्रोग्राम किए जिससे 500 रुपये उन्हें मिले और पिता को दे दिया। तब जाकर गंडा बंधाई की रस्म पूरी हुई। पं. बिरजू महाराज ने अपने पिता की मौत के बाद दसवां और तेरहवीं करने के लिए शो करके पैसे जुटाता है। पंडित बिरजू महराज ने एक इंटरव्यू में यह बातें कहीं थीं।