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सड़क पर नहीं निकलेंगे जुलूस, इमामबाड़ों में होगी मजलिस

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मोहर्रम में ताजियादारी का आयोजन कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार ही किया जाएगा। ताजियों को घराें के इमामबाड़ों में स्थापित तो किया जाएगा, लेकिन कर्बला तक ले जाने के लिए जुलूस नहीं उठाया जाएगा। ताजियों पर चढ़ाए गए फूल ही कर्बला ले जाकर दफन किए जाएंगे। यह जानकारी मुफ्ती ए शहर मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी, मौलाना हारून नक्शबंदी व हाजी फरमान हैदर ने संयुक्त प्रेसवार्ता में दी।
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पराड़कर भवन में रविवार को हुई प्रेसवार्ता में मुफ्ती ए शहर ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत के सिलसिले से मनाया जाने वाला मोहर्रम चांद दिखने के बाद नौ या 10 अगस्त से शुरू होकर 20 अगस्त तक कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार मनाया जाएगा। इस दौरान सड़कों पर मोहर्रम के जुलूस नहीं निकलेंगे। घरों और इमामबाड़ों में ही मजलिसों के आयोजन किए जाएंगे। प्रतीकात्मक स्वरूप ताजियादी होगी और लोग इसका दीदार कर सकेंगे। मौलाना हारुन नक्शबंदी ने कहा कि माहौल को खराब करने की मंशा रखने वाले समाज के दुश्मनों पर प्रशासन को कड़ी निगरानी रखनी होगी। शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता हाजी फरमान हैदर ने बताया कि मोहर्रम तो दो महीना आठ दिन मनाया जाता है, लेकिन एक मोहर्रम से 12 मोहर्रम तक बहुत शिद्दत के साथ मनाया जाता है। मौलाना बशीर ने कहा के हमें प्रशासन की शब्दावली से बड़ी ठेस पहुंची है।
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