बताते चलें कि त्रिवेणी कवि के रूप में चर्चित प्रो. अभिराज मूल रूप से जौनपुर के बक्सा ब्लॉक के द्रोणिपुर गांव के निवासी हैं। वह सम्पूर्णनंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे। फिलहाल वह शिमला में रह रहे हैं। अस्सी वर्षीय प्रो. अभिराज राजेंद्र मिश्र की इंटर तक की पढ़ाई जौनपुर के जयहिंद इंटर कॉलेज से हुई।
प्रयागराज विश्वविद्यालय से स्नातक, परास्नातक और पीएचडी करने के बाद वर्ष 1966 से 1991 तक वहीं अध्यापन भी किया। वह भारत सरकार की ओर से तीन वर्ष तक इंडोनेशिया के बाली में विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे। वर्ष 1991 में शिमला विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग के हेड के रूप में सेवाएं दी और वर्ष 2002 में वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में कुलपति बने। वर्ष 2005 में सेवानिवृत्ति के बाद भी निरंतर साहित्य सृजन में लगे हुए हैं।
संस्कृत, हिंदी की दर्जनों पुस्तक लिख चुके प्रो. अभिराज को साहित्य अकादमी, वाचस्पति, विश्वभारती सहित ढेरों पुरस्कार मिल चुके हैं। वह साहित्य अकादमी में संस्कृत के परामर्शदात्री संस्था के संयोजक भी हैं। प्रो. अभिराज को पद्म पुरस्कार दिए जाने की घोषणा पर जिले के लोगों में खुशी है। डॉ. यूके तिवारी, शैलेन्द्र सिंह वत्स, डॉ एसके वर्मा, डॉ देवव्रत मिश्र, सभाजीत द्विवेदी प्रखर, डॉ सरोज सिंह आदि ने प्रसन्नता जताते हुए बधाई दी।