बंदी बिना खाए कोर्ट चले गए। जो बचे उन्होंने दिनभर नारेबाजी की और अपने-अपने बैरकों में धरने पर बैठ गए। शाम को डीआईजी ने उन्हें बीड़ी, सुर्ती, गुटका पर प्रतिबंध हटाने का आश्वासन देकर खाने के लिए राजी किया। रात 8 बजे बंदियों ने खाना खाया। डीआईजी जेल डीएस यादव ने बताया कि बीड़ी, सुर्ती, गुटका पर रोक नहीं है। उन्हें देने का भरोसा दिया गया है। इसके अलावा खाने की गुणवत्ता में सुधार कराया जाएगा।
पांच हजार देने पर मिलता है मोबाइल :
पेशी से लौटे बंदियों ने जेल गेट पर बताया कि हमारे हक पर जेल प्रशासन डाका डाल रहा है। कैंटीन से जो सामान दिया जा रहा है। उस पर रेट के तीन गुना पैसा वसूल किया जाता है। बंदी रक्षक चार हजार से आठ हजार लेकर मोबाइल मुहैया कराते हैं। दाल में ठंडा पानी डालकर दिया जाता है। जेल अधीक्षक राउंड नहीं करते। कैंटीन से ही बीड़ी, सुर्ती, सिगरेट, गुटका और अन्य सामान बेचा जा रहा है।