विज्ञापन का स्क्रीन शॉट
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इसके साथ ही प्रोजेक्ट का नाम पीएमओ कार्यालय वाराणसी लिखा गया है। गुरुवार को यह विज्ञापन सोशल मीडिया में वायरल होने लगा तो शाम के समय पुलिस ने उसे ओएलएक्स से हटवा दिया।
इस संबंध में शुक्रवार को एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि ओएलएक्स द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर भेलूपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। इसके साथ ही विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर की मदद से इंस्पेक्टर भेलूपुर अमित कुमार मिश्रा और दुर्गाकुंड चौकी इंचार्ज प्रकाश सिंह ने अपनी टीम के साथ चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
क्या बताएं कुछ समझ में ही नहीं आया, गलती तो बड़ी हो गई
एसएसपी के अनुसार, डॉ. लक्ष्मीकांत ओझा चंदौली में अलीनगर स्थित एक दिव्यांग विद्यालय में शिक्षक है और पुस्तकें भी लिख चुका है, उसकी कुछ पुस्तकें अभी प्रकाशित भी होने वाली हैं। लक्ष्मीकांत ने बताया कि वह अपने परिचित दूध-दही दुकानदार मनोज, बिजली मिस्त्री बाबूलाल और चाय दुकानदार जितेंद्र के बहकावे में आ गया था। तीनों ने उससे कहा था कि इस नामीगिरामी भवन की कीमत साढ़े सात करोड़ में तय हो गई तो उसे घर बैठे कमीशन का एक प्रतिशत साढ़े सात लाख रुपये आसानी से मिल जाएगा।
तीनों उसे यह भी कहते थे कि प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय के भवन की बिक्री की चर्चा शहर में जोरशोर से है और हम ही लोग क्यों न अगुुुआ बनकर इसे बेच दें। लक्ष्मीकांत ने बताया कि वह स्मार्ट फोन को बहुत अच्छे तरीके से इस्तेमाल करना भी नहीं जानता है। उसकी मति कैसे भ्रष्ट हो गई थी और यह सब कैसे हो गया, वह समझ ही नहीं पा रहा है।