मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : अमर उजाला।
सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि :
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशीवासी डोमराजा जगदीश चौधरी के निधन पर शोक-संवेदना प्रकट की है। उन्होंने ट्वीट किया कि सामाजिक समरसता की भावना के प्रतीक पुरुष, काशीवासी डोमराजा जगदीश चौधरी का निधन अत्यंत दुखद है। जगदीश चौधरी का कैलाशगमन सम्पूर्ण भारतीय समाज की एक बड़ी क्षति है। बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना है कि आपको अपने परमधाम में स्थान प्रदान करें।
बता दें कि वाराणसी से दूसरी बार नामांकन भरने वाले मोदी के प्रस्तावकों में डोम राजा जगदीश चौधरी भी शामिल थे। तब डोम राजा ने कहा था कि, ‘पहली बार किसी राजनीतिक दल ने हमें यह पहचान दी है और वह भी खुद प्रधानमंत्री ने। हम बरसों से लानत झेलते आए हैं।
हालात पहले से सुधरे जरूर हैं, लेकिन समाज में हमें पहचान नहीं मिली है और प्रधानमंत्री चाहेंगे तो हमारी दशा जरूर बेहतर होगी।’ उन्होंने यह भी कहा था कि, ‘नेता वोट मांगने आते हैं लेकिन बाद में कोई सुध नहीं लेता।’ डोम बिरादरी का इतिहास काफी पुराना है।
उन्होंने पीएम मोदी का प्रस्तावक बनने पर गर्व जताते हुए कहा था कि ‘यह पूरी बिरादरी के लिए गर्व की बात है कि मैं प्रधानमंत्री का प्रस्तावक बन सका। हम समाज में पहचान पाने को तरस गए हैं। उम्मीद है कि नरेंद्र मोदी जीतने के बाद हमारी पीड़ा समझेंगे और हमें वह दर्जा समाज में दिलाएंगे जिसकी शुरुआत आज हुई है।’
इसलिए कहते हैं डोम राजा :
वाराणसी में अंतिम संस्कार मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर होता है। दोनों घाटों पर अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी डोम समाज के पास है। काशी में इस प्रमुख जिम्मेदारी को निभाने के कारण इन्हें डोम राजा कहा जाता है।
हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका घाट में करीब 500 से 600 डोम रहते हैं। जबकि उनकी बिरादरी में पांच हजार से ज्यादा लोग हैं। दोनों घाटों पर सभी डोम की बारी लगती है और कभी दस दिन या बीस दिन में बारी आती है। बाकी दिन बेगारी। कोई स्थायी नौकरी नहीं है और कमाई भी इतनी नहीं कि बच्चों को अच्छी जिंदगी दे सकें।