रिंग रोड के बाद वाराणसी की यह दूसरी बड़ी परियोजना होगी। इसे तैयार करने वाली कार्यदायी संस्था डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेशन सब पूरा करने के बाद ट्रांसफर करेगी। ऐसे में शासन से मंजूरी के बाद ही इसकी नियम शर्तें तय की जाएंगी। इस भवन की प्लेटिनम रेटिंग की जाएगी। इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) मांगी गई है।
एक नजर में परियोजना
- एकीकृत मंडलीय कार्यालय वाराणसी परियोजना
- 26,051 वर्गमीटर में तैयार होगी दो भूतल सहित 18 मंजिला दो इमारतें
- परियोजना की अनुमानित लागत- 324.88 करोड़
- परियोजना की अनुमानित अवधि- 18 महीने
- दोनोें इमारतों को जोड़ते हुए प्रदेश का पहला स्काई वॉक बनेगा
- 45 सरकारी कार्यालय होंगे शिफ्ट, एक भवन पूरी तरह से कार्यदायी संस्था के जिम्मे
आजादी का अमृत महोत्सव के तहत मंगलवार को लखनऊ में आयोजित अर्बन कांक्लेव में पीएम नरेंद्र मोदी ने मोबा एप के माध्यम से अपने संसदीय क्षेत्र में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान की ऑनलाइन व्यवस्था देखी। इससे पहले उन्होंने मोबा एप की लांचिग की। इसकी शुरुआत वरुणा पार जोन के विंध्यवासिनी नगर कालोनी से हुई। इस व्यवस्था से नगर निगम के अन्य चार जोनों में भी सफाई व्यवस्था की मॉनीटरिंग जल्द शुरू होगी।
इस दौरान कार्यक्रम में नगर निगम की ओर से सफाई व्यवस्था से लेकर स्मार्ट सिटी के तहत होने वाले कार्यों को स्टाल के जरिए प्रदर्शित किया। पीएम ने भी इसे निहारा। इस दौरान अधिकारियों ने पीएम को क्यूआर कोड और जीओ टैगिंग के माध्यम से होने वाले इस ऑनलाइन कूड़ा उठान व उसकी मॉनीटरिंग के बारे में बताया। निगम के अधिशासी अभियंता अजय राम ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत मोबा एप से कूड़ा उठान सहित निगम की करीब 200 कूड़ा गाड़ियां जीपीएस से लैस होने की जानकारी दी।