सर्व विद्या की राजधानी काशी में अखिल भारतीय शिक्षा समागम के दूसरे दिन शिक्षाविदों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शोध, शिक्षा, ऑनलाइन शिक्षा और भारतीय भाषा व ज्ञान पर मंथन किया। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के चेयरमैन प्रो. अनिल डी सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि हमें विद्यार्थियों की पसंद व बाजार तथा उद्योग की आवश्यकता के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार करने हाेंगे। विद्यार्थियों को विषयों के व्यापक विकल्पों में से चुनने का मौका दिया जाए। भारतीय शिक्षा पद्धति में अनुवाद को लेकर चुनौतियां पैदा होती हैं, ऐसे में उनके समाधान के लिए प्रभावी रास्ते तलाशने होंगे।
शुक्रवार को सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में तीन दिवसीय समागम में शिक्षाविदों ने डिजिटल इंपावरमेंट, ऑनलाइन एजुकेशन, भारतीय भाषा और ज्ञान के विविध आयामों पर भी चर्चा की। पहले सत्र में आईआईएससी बंगलूरू के निदेशक प्रो. जी रंगराजन ने कहा कि राज्य विश्वविद्यालयों में शोध के लिए वातावरण तैयार करना होगा। इसमें राज्य सरकारों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य प्रो. एमके श्रीधर ने कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में एथिकल लीडरशिप विकसित करना होगी। हम अपनी जिम्मेदारियों से नहीं भाग सकते हैं। भारत के शैक्षणिक संस्थानों में ही व्यापक विविधता है। उन सभी का मूल्यांकन करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। सभी के लिए एक जैसे मानक लागू नहीं हो सकते हैं। सभी को अपने संस्थानों के लिए योजनाएं बनानी होंगी, जो यह स्पष्ट रूप से बताएं कि हमारे संस्थानों से क्या अपेक्षित है। इस दौरान राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान समेत देश भर के शिक्षाविद मौजूद रहे।
शिक्षक प्रस्तुत करे हर सत्र में नया संस्करण
क्वालिटी रैंकिंग एंड एक्रेडिटेशन विषयक सत्र को संबोधित करते हुए नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडिटेशन के चेयरमैन प्रो. केेके अग्रवाल ने कहा कि रैंकिं ग, रेटिंग व एक्रीडिटेशन गुणवत्ता के ही विभिन्न स्वरूप हैं। एक शिक्षक भी शैक्षणिक सत्र में अपना नया संस्करण प्रस्तुत करे तो गुणवत्तापरक शिक्षा आसानी से संभव हो पाएगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति से होगा सभी का विकास
इक्यूटेबल एंड इन्क्लूसिव एजूकेशन पर चर्चा करते हुए मौलाना आजाद उर्दू नेशनल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. सैय्यद ऐनुल हसन ने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था में राष्ट्रीय शिक्षा नीति बाधक नहीं है। इसमें सभी के लिए विकास की बात कही गई है। इससे भारत की सभी जातियों को पढ़ने का समान अवसर मिलेगा। यह महिला शिक्षा को भी सपोर्ट करती है।
स्कूल से ही करना होगा भारतीय भाषा का प्रोत्साहन
भारतीय भाषा और भारतीय ज्ञान व्यवस्था पर भारतीय भाषा परिषद के चेयरमैन प्रो. चम्मू कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भाषा पढ़ाना तथा भाषा के माध्यम से पढ़ाना दोनों अलग-अलग विषय हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं में अध्ययन व अनुसंधान की बात कहती है। स्कूल शिक्षा के स्तर से ही भारतीय भाषा का प्रोत्साहन करना होगा।
कोर्स आधारित पंजीकरण का समय
सक्सेज स्टोरीज एंड बेस्ट प्रैक्टिस ऑफ एनईपी -2020 पर चर्चा करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि कोर्स आधारित पंजीकरण किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को पूरा प्रोग्राम न पढ़ना पड़े। फ्लेक्सी एडमीशन व एग्जिट की सुविधा के साथ अग्रिम व वृहद पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए क्रैश कोर्स शुरू करने होंगे।
भारतीय भाषाओं को बढ़ाने के लिए इंडियन नॉलेज सिस्टम स्थापित
इंडियन नॉलेज सिस्टम के समन्वयक प्रो. गंती सूर्यनारायण मूर्ति ने कहा कि भारतीय भाषाओं को बढ़ाने के लिए इंडियन नॉलेज सिस्टम की स्थापना की गई है। इसका मुख्य कार्य भारतीय ज्ञान प्रणाली को तकनीक से जोड़ना है। रामकृष्ण मिशन विवेकानंद शैक्षिक और अनुसंधान संस्थान के कुलपति प्रो. स्वामी सर्वोत्तमानंद ने कहा कि पहली बार एनईपी में भारत की धरोहरों को शामिल किया गया है।
बोले विश्वविद्यालयों के कुलपति
बेरोजगारी की समस्या का समाधान
नई शिक्षा नीति युवाओं को भविष्य के लिए तैयार क रेगी। वह रोजगार ढूंढने वाले नहीं बल्कि सृजन करने वाले बनेंगे। इस नीति में हमारी भावी पीढ़ी के मन में भारतीयता की अवधारणा के साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर दिया गया है। डिजिटल लर्निंग कभी भी क्लास रूम टीचिंग का विकल्प नहीं बन सकता है। - प्रो. कल्पलता पांडेय, जननायक चंद्रशेखर बलिया विश्वविद्यालय
युवाओं की प्रतिभा निखारने का मौका
नई शिक्षा नीति से छात्रों की प्रतिभा तो निखरेगी ही। शिक्षकों को भी सीखने का मौका मिलेगा। नई नीति की शिक्षा युवाओं की प्रतिभा और कुशलता को नया पंख देगी। वह विश्व भर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे। उद्योगों के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार हाेंगे। नई शिक्षा नीति की सफलता के लिए लोगों को सोच में बदलाव लाना होगा। - प्रो. रमाशंकर दुबे, केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात
प्रतिभा के अनुसार विषय चुन सकेंगे
नई नीति तकनीकी शिक्षा पर जोर देने के साथ राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच की स्थापना सरीखे नवीन सुधारों पर जोर देती है। यह वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा पर बढ़ावा देगी। विश्वविद्यालयों में अंर्तविषयी अध्ययन केंद्र बनेंगे। छात्र अपनी प्रतिभा व रुचि के अनुसार विषयों का चयन कर सकते हैं। इनोवेशन लैब उन्हें शोध के प्रति प्रेरित करेगा। - प्रो. सुखदेव गोहाई, बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, धनबाद
शिक्षा के साथ सुधरेगी शोध की गुणवत्ता
नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को नए स्वरूप में ढेर सारे अवसर प्रदान करेगी। शिक्षा के साथ ही शोध की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। इसका फायदा समाज व देश को भी मिलेगा। 30 साल के बाद तैयार नीति के मसौदे ने शिक्षा जगत के लिए ढेर सारे अवसर उपलब्ध कराए हैं। यह 100 साल को ध्यान में रख तैयार किया गया है। यह युवाओं को रोजगार देने वाला बनाएगी। - प्रो. उमेश राय, कुलपति, जम्मू विश्वविद्यालय