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विश्वविद्यालयों के नए पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव की तैयारी, अनिवार्य होगी भारतीय ज्ञान परंपरा

Sun, 17 Jan 2021 06:08 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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हिंदी - फोटो : iStock
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नई शिक्षा नीति के अनुसार विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में बदलाव की तैयारियां शुरू हो चुकी है। स्नातक, स्नातकोत्तर से लेकर शोध के सभी विषयों में पहला पाठ भारतीय ज्ञान परंपरा और हिंदी की किताबों को शामिल करने की तैयारी है। राज्यस्तरीय समिति ने विश्वविद्यालयों में नई शिक्षा नीति केअनुसार न्यूनतम समान पाठ्यक्रम की तैयारियां तेज कर दी हैं।

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पांच संकायों की सुपरवाइजरी समितियों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के शिक्षकों से भी पाठ्यक्रम निर्धारण के लिए सुझाव मांगे गए हैं। इसके तहत सभी विषयों की पहली यूनिट में पहला पाठ संबंधित विषय की भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित रखा जाएगा। स्नातक स्तर से ही शोध को बढ़ावा देने के लिए अपनी भाषा में शोध कार्यों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। नए पाठ्यक्रम में 50 फीसदी थ्योरी और 50 फीसदी प्रैक्टिकल को शामिल किया जाएगा। सभी पाठ्यक्रमों की रेफरेंस लिस्ट में हिंदी लेखकों की पुस्तकें जोड़ी जाएंगी। इससे छात्रों को द्विभाषी पाठ्यक्रम उपलब्ध हो सकेगा।

भारतीय ज्ञान परंपरा के  पाठ्यक्रम
प्राचीन भारत में संवाद परंपरा, अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र की भारतीय परंपरा, प्राचीन भारत में ज्ञान का आध्यात्मिक आधार, वैदिक गणित, प्राचीन भारत में जीव विज्ञान एवं आयुर्वेद, भारतीय मेगालिथ रचनाओं की वैज्ञानिकता, अनुसंधान की भारतीय दृष्टि एवं शिक्षा पद्धति तथा भारत में वैदिक विज्ञान परंपरा शामिल होगी।

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बनेगा विषय विशेषज्ञों का समूह
मुख्य विषयों के अतिरिक्त लाइब्रेरी साइंस एवं अन्य पाठ्यक्रमों के निर्माण केलिए विषय विशेषज्ञों के समूह बनाए जाएंगे। स्नातक स्तर के सभी विषयों एवं कंपल्सरी कोर्स के पाठ्यक्रम उतर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। इन पाठ्यक्रमों पर प्रदेश भर के विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के शिक्षकों से सुझाव मांगे जाएंगे।

जल्द भेजा जाएगा प्रस्ताव
काशी विद्यापीठ के कुलसचिव डॉ. एसएल मौर्य ने बताया कि शासन ने न्यूनतम समान पाठ्यक्रम के लिए प्रस्ताव मांगा गया है। निर्धारित तिथि में प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजबहादुर का कहना है कि न्यूनतम समान पाठ्यक्रम में प्राच्य विद्या को महत्वपूर्ण स्थान मिलेगा। प्रस्ताव जल्द तैयार करके भेजा जाएगा।

प्रोजेक्ट बेस होंगे स्नातक व स्नातकोतर के पाठ्यक्रम
राज्य के विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोतर पाठ्यक्रम प्रोजेक्ट बेस होंगे। स्नातक स्तर पर ही छात्रों को अनुसंधान कार्यों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
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