विषम हालात से जूझती निर्मला, डॉ. चड्ढा का अहंकार, जोखू, हरिया की दीनता, बिसुआ, भगत की संवेदनशीलता ने हर किसी के अंतर्मन को झकझोर कर रख दिया। देश ही नहीं दुनिया भर में मुंशी प्रेमचंद ही शायद अकेले साहित्यकार होंगे जिनकी जयंती पर उनके गांव में मेला सजता है।
कठपुतली नृत्य में दिखा मुंशी प्रेमचंद का जीवन दर्शन
मुंशी प्रेमचंद जयंती पर रविवार को डीएवीपीजी कॉलेज के छात्रों ने उनके गांव लमही का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान जहां ग्रामीणों के साथ ही मुंशी प्रेमचंद के जीवनी पर चर्चा की वहीं कठपुतली नृत्य के माध्यम से भी उनका जीवन दर्शन देखने को मिला।
हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार राम के नेतृत्व में छात्रों ने सबसे पहले प्रेमचंद के घर और गांव का भ्रमण कर गांव के लोगों से ही प्रेमचंद के बारे में जानकारी हासिल की। डॉ. राकेश कुमार राम ने कहा कि प्रेमचंद को याद करना आज के दौर में सामाजिक विषमता और आर्थिक संकट से जूझ रहे मध्यवर्ग के संघर्ष को याद करना है।