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अमर उजाला पड़ताल: कैंट बस अड्डे पर गड्ढों का जाल, 15 हजार यात्रियों की जोखिम में जान; रोजाना चलती हैं 100 बसें

Wed, 10 Jun 2026 04:30 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: वाराणसी से प्रयागराज, लखनऊ समेत कई जिलों तक रोजाना रोडवेज की 100 बसें चलती हैं। वहीं स्टेशन परिसर में जगह-जगह गड्ढे हैं, जिससे यात्रियों के गिरने की संभावना बनी रहती है। 
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रोडवेज बस स्टेशन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कैंट रेलवे स्टेशन के निकट स्थित अंतरराज्यीय बस अड्डे की बदहाल स्थिति यात्रियों के लिए सिरदर्द बन गई है। यहां गड्ढों के जाल से रोजाना सफर करने वाले 15 हजार यात्रियों की जान जोखिम में रहती है। स्टेशन परिसर में जगह-जगह बने गड्ढे न केवल यात्रियों को असुविधा पहुंचा रहे हैं बल्कि बड़े हादसे का कारण भी बन सकते हैं। अधिकारी भी इसी रास्ते से आते-जाते हैं लेकिन किसी का इस ओर ध्यान नहीं गया कि यात्रियों को समस्या से राहत दिला सकें।

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रोडवेज बस स्टेशन वाराणसी से गोरखपुर, नौतनवां, सोनौली से लेकर प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर से लेकर वाराणसी और आसपास के जिलों तक हर दिन करीब 100 बसों का आना जाना होता है। मंगलवार को अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया है कि बस अड्डे के परिसर में जगह-जगह गहरे गड्ढे हो गए हैं। 

यात्रियों को बस में बैठने के बाद ही इन गड्ढों के कारण झटके लग रहे हैं। यहां स्टेशन परिसर में इतने गड्ढे हैं कि बरसात में पानी भरने के अलावा सामान्य मौसम में भी आवाजाही में दिक्कत होती है। रात में तो ये गड्ढे दिखते भी नहीं हैं। इससे यहां से सामान लेकर जाने वालों में गिरने का डर बना रहता है। सबसे खराब स्थिति प्लेटफॉर्म नंबर 6 से 12 तक बना है। यहां जिस जगह बस खड़ी होती है, उसी जगह हर ओर सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है।
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यात्रियों की जुबानी, बदहाल व्यवस्था का दर्द
जौनपुर निवासी बबलू को सोमवार को वाराणसी से जौनपुर जाना था। उन्होंने बताया कि अभी बस स्टेशन कैंपस में ही बस जैसे ही निकली, यहां गड्ढ़ों की वजह से ऐसा झटका लगा कि सीट से नीचे गिरते-गिरते बचे। वाराणसी से गाजीपुर जाने वाले किंसुक पांडेय ने बताया कि कई वर्षों से रोडवेज का सफर कर रहे हैं, लेकिन अब बस में बैठने के बाद ही डर लगता है। रेणुकूट निवासी बृजेश खंडेलवाल का कहना है हर सप्ताह एक बार व्यवसाय के सिलसिले में बनारस आना होता है। रोडवेज का सफर ही करते हैं। वाराणसी से जब बस में बैठे और बस चलनी शुरू हुई तो झटका महसूस हुआ। नीचे उतर कर देखा कि पहिया गड्ढे में घुस गया था।
कोट

बस स्टेशन का पीपीपी मॉडल पर कायाकल्प किया जाना है। इस दिशा में कागजी कार्रवाई चल रही है। फिलहाल जिन जगहों पर गड्ढे हैं, उसे भरवाने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी ताकि यात्रियों को कोई परेशानी न हो। -परशुराम पांडेय, क्षेत्रीय प्रबंधक, अंतरराज्जीय बस अड्डा, वाराणसी

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