महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने बीएचयू की स्थापना के तीन साल बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए 1919 में बनारस इंजीनियरिंग कॉलेज की शुरुआत कराई। आगे चलकर इसका नाम आईटी बीएचयू हो गया। 2012 में इसे आईआईटी का दर्जा मिला।
आईआईटी बीएचयू में छात्रा से छेड़खानी की घटना के बाद दीवार चलवाने का फैसला तो ले लिया गया , लेकिन कैंपस में सुरक्षा के लिए दीवार कोई सॉल्यूशन नहीं है। पहले से ही पूरे विश्वविद्यालय परिसर की बाउंड्री वाल चारों तरफ से 10 से 12 फीट बनी है। सुरक्षा के नाम पर परिसर के भीतर बाउंड्री चलाने की बात क्या उठी, हर तरफ विरोध के स्वर उठने लगे है। परिसर में बीएचयू और आईआईटी को मिलाकर करीब 90 छात्रावास हैं। इनमें करीब 20 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं रहते हैं। शिक्षक और कर्मचारियों के 600 से अधिक आवास भी हैं। जहां करीब पांच हजार लोग 24 घंटे रहते हैं। ऐसे में सुरक्षा की बात पूरे परिसर की होनी चाहिए थी, न कि आईआईटी में दीवार चलवाने की।
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आईआईटी बीएचयू परिसर में दीवार बनाए जाने के प्रशासनिक फैसले को पूरा करना आसान नहीं है। 2012 में बीएचयू को आईआईटी का दर्जा मिलने के दौरान जो एक्ट बना गया था, उसमें ये प्रस्ताव भी शामिल था कि आईआईटी बीएचयू विश्वविद्यालय से अलग नहीं होगा। करीब 9 साल पहले, 2014 भी आईआईटी बीएचयू परिसर में बाउंड्रीवॉल बनाए जाने की पहल हुई थी लेकिन ऐसा हो नहीं सका था।
महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने बीएचयू की स्थापना के तीन साल बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए 1919 में बनारस इंजीनियरिंग कॉलेज की शुरुआत कराई। आगे चलकर इसका नाम आईटी बीएचयू हो गया। 2012 में इसे आईआईटी का दर्जा मिला। इसके लिए एक अमेंडमेंट एक्ट भी पारित किया गया था जिसमें देश भर के अन्य आईआईटी के साथ ही आईआईटी बीएचयू को लेकर भी कई अहम फैसले किए गए थे। इस एक्ट के बाद आईटी से आईआईटी बीएचयू बन गया।
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ऐसी सुरक्षा का क्या फायदा
-आईआईटी बीएचयू और बीएचयू में 1200 सुरक्षा कर्मी है। इसमें खुद का एलआईयू, इंटेलीजेंस, पेट्रोलिंग गाड़ियां, सीसी कैमरे लगे हैं। फिर भी अपराध जारी हैं।
-बाहरियों का प्रवेश परिसर में प्रतिबंधित है तो सारी रात कैसे बाइक सवार घूमते रहते हैं।
-प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने जगह-जगह सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की। पेट्रोलिंग भी होती है। लेकिन 40 प्रतिशत इलाका ऐसा है जहां न तो कोई सुरक्षाकर्मी है न ही सीसीटीवी।
हर दिन आते हैं 40 हजार से अधिक लोग
बीएचयू कैंपस में हर दिन बाहर से भी करीब 40 हजार लोग आते हैं। इसमें करीब 15 हजार लोग अस्पताल में मरीज, तीमारदार होते हैं, जबकि परिसर के विश्वनाथ मंदिर में भी 25 हजार लोग दर्शन करने आते हैं। इन सभी लोगों की जांच या पूछताछ मुमकिन नहीं। मंदिर में तो रात में बंद होने के बाद कोई आता-जाता नहीं, लेकिन अस्पताल परिसर में तो 24 घंटे लोगों की आवाजाही रहती है।
एक नजर में बीएचयू
हॉस्टल -79
छात्र-40
छात्रा-39
छात्र-छात्राएं-16040
शिक्षक-कर्मचारी आवास-600
रहने वाले लोग-4000 लोग
आईआईटी बीएचयू
हॉस्टल-12
छात्र-छात्रा-4000
शिक्षक-कर्मचारी आवास-200
रहने वाले लोग-1500 से 2000
बीएचयू जैसी संस्था में परिसर के भीतर दीवार चलाने जैसे फैसले का कोई औचित्य समझ नहीं आता है। मेरे कुलपति के कार्यकाल में भी बात उठी थी। कैंपस में सुरक्षा का विकल्प दीवार चलाना थोड़े है। इसके लिए और भी कई ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। सुरक्षा के अन्य पहलुओं पर विचार करना चाहिए। -प्रो. पंजाब सिंह, पूर्व कुलपति, बीएचयू
आईआईटी बीएचयू परिसर में सुरक्षा के मुद्दे पर नए सिरे से रणनीति बनाने की जरूरत है। इसके लिए बैरीकेडिंग, नाइट पेट्रोलिंग करने, समय-समय पर परिसर में अभियान चलाकर बाहरियों से पूछताछ करने जैसी कार्रवाई करने की जरूरत है। -प्रो. बीएन राय, पूर्व छात्र अधिष्ठाता, आईआईटी बीएचयू
महामना मालवीय जी ने एक परिवार की तरह विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। आईआईटी को पहले ही अलग कर गलत किया गया। दीवार चलवाकर घटनाएं रुक जाएंगी क्या। सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करना चाहिए। प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों की संख्या लंबी है, लेकिन कुछ होता ही नहीं है। समय-समय पर बाहरियों की जांच कर कार्रवाई हो। -अनिल श्रीवास्तव, पूर्व अध्यक्ष, बीएचयू छात्रसंघ
यह महामना की आत्मा पर दीवार चलाने जैसा होगा। आईआईटी जब बीएचयू का हिस्सा नहीं रहा तो इसके लिए मिले दान की भूमि पर उसका कोई अधिकार भी नहीं है। यहां दीवार किसी कीमत पर नहीं चलने दिया जाएगा। -डॉ. अरविंद कुमार शुक्ल, पूर्व उपाध्यक्ष, बीएचयू छात्रसंघपूर्व में