इस दौरान राय पुष्पलता ने एक वाद में अपनी जान-माल की सुरक्षा का जिक्र किया था और बताया था कि प्रशासन की ओर से उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई गई थी। मगर, समय बीतने के साथ ही उनकी सुरक्षा हटा ली गई। सूत्रों की मानें तो रानी साहिबा के नाम से मशहूर राय पुष्पतला अकेली ही रहती थी और लोगों से बहुत कम मिलती थी। स्वभाव से बहुत जिद्दी रानी साहिबा सीलिंग की लड़ाई अंतिम समय तक लड़ती रही।
इस दौरान उन्होंने राय साहब की बगीचा जमीन का सौदा कई बार किया और इसमें पैसे का लेनदेन भी हुआ, मगर उनके पास कोई धन नहीं मिला। यहां बता दें कि पांच सितंबर 2019 को राय पुष्पलता की मौत के बाद 13 सितंबर 2019 को विकास प्राधिकरण के कब्जे की जमीन का सट्टा इकरारनामा बनारस और मुंबई की दो कंस्ट्रक्शन कंपनियों को कर दिया गया। इस मामले में गुरुवार को विकास प्राधिकरण ने सट्टा करने और करवाने वालों के खिलाफ कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
कृष्णचंद्र राय के वसीयत से तय होगा मालिकाना हक
कृष्णचंद्र राय की दो रजिस्टर्ड वसीयतें प्रशासन के सामने हैं और उसकी सत्यता की जांच कराई जा रही है। इसमें साफ तौर पर लिखा है कि राय पुष्पतला उनके साथ रहती हैं और बाकी दोनों बेटियों स्नेहलता व सरोज लता के हिस्से को लेकर जिक्र किया गया है। अधिकारियों की मानें तो वर्ष 1969 और 1973 की इन वसीयत की जांच के बाद कृष्णचंद्र राय की संपत्ति पर दावा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल वसीयत से शहर में अन्य संपत्तियों को लेकर स्थिति साफ होती नजर आ रही है।
अन्य संपत्तियों पर भी लोगों की नजर
राय पुष्पतला के मालिकाना हक वाली कई संपत्तियों पर अब लोगों की निगाह है। कृष्णचंद्र राय के बाद राय पुष्पलता कई ट्रस्टों में मुख्य भूमिका में थी। पांच सितंबर को उनकी मौत के बाद उन संपत्तियों पर भी लोगों की नजर है। बेनिया बाग की जमीन, पागलखाने की जमीन, जिला जेल के पीछे खाली पड़ी जमीन सहित अन्य संपत्तियों पर अलग-अलग दावे सामने आ सकते हैं।