वाराणसी के दुर्गाकुंड स्थित अंध विद्यालय के बंद होने के विरोध में पिछले 26 दिनों से दुर्गाकुंड-लंका मार्ग जाम कर धरने पर बैठे दिव्यांग (दृष्टिबाधित)छात्रों को पुलिस ने रविवार आधी रात के बाद जबरन उठा लिया। पुलिस की इस कार्यवाही के विरोध में बीएचयू में रहने वाले दिव्यांग छात्र दुर्गाकुंड जाने के लिए निकल पड़े, जिनको पुलिस में बीएचयू गेट के पास रोक लिया। छात्रों ने मुख्य द्वार पर प्रदर्शन कर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाया है।
हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय के बंद होने के विरोध में छात्र विद्यालय के बाहर रास्ता जाम कर धरना प्रदर्शन कर रहे थे। छात्रों के विरोध में व्यापारियों ने भी धरना शुरू कर दिया था। रविवार रात जब छात्र सो रहे थे तभी करीब-करीब दो बजे एडीएम सिटी, एसीपी भेलूपुर की अगुवाई में धरनास्थल से 12 छात्रों को पुलिस ने जबरन उठा लिया।
जैसे ही यह जानकारी बीएचयू में रहने वाले दिव्यांग छात्रों को मिली तो वह भड़क गए। बीएचयू गेट पर पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। छात्रों के हंगामे को बढ़ता देख यहां कई थाने की फोर्स पहुंची। इस दौरान छात्रों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की।
बीएचयू गेट पर तैनात पुलिस
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दिव्यांग छात्र अभय शर्मा ने बताया कि सभी साथी धरना स्थल पर सो रहे थे इस दौरान पुलिस ने जबरन हटा दिया। उनका कहना था कि रविवार को ही दिन में कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर से मुलाकात के दौरान सोमवार सुबह तक धरना स्थगित करने की बात कही गई थी लेकिन पुलिस ने ऐसा क्यों किया यह समझ से परे है। इस तरह की कार्रवाई है गलत है। छात्रों के प्रदर्शन की वजह से सुबह करीब आठ बजे तक मुख्य द्वार से परिसर के भीतर आवागमन प्रभावित रहा।
अंध विद्यालय दुर्गाकुंड को बंद करने के विरोध में पिछले 26 दिन से धरनारत छात्रों से रविवार को प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने सर्किट हाउस में बातचीत की थी। उन्होंने कक्षा 9 से 12 के संचालन में आ रही समस्या के बारे में प्रबंध समिति से भी बातचीत की।
इस दौरान अनिल राजभर ने छात्रों को शासन स्तर पर प्रयास कर जल्द से जल्द उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था। बातचीत में छात्रों से दुर्गाकुंड पर चल रहे धरना प्रदर्शन को समाप्त करने को कहा गया, जिस पर छात्रों द्वारा दुर्गाकुंड मुख्य मार्ग से हटने के प्रति रजामंदी व्यक्त की गई थी।