प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सांसद आदर्श गांव नागेपुर डिजिटल क्रांति का गवाह बनेगा। जब से पीएम ने इस गांव को गोद लिया है तब से वह लगातार सुर्खियों में है। गांव के युवा आजकल जिले के सभी गांवों का डिजिटल डाटाबेस तैयार करने के अभियान में जुटे हैं। इसी क्रम में गांव की ही संस्था लोक समिति के परिसर में एक कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें दिल्ली की संस्था ‘संवाद मीडिया’ ने युवाओं को स्मार्ट फ़ोन के जरिए जीपीएस टेक्नोलॉजी के विविध उपयोगों की जानकारी दी।
नए जमाने के स्मार्टफोन में ऐसी कई सुविधाएं हैं, जिनकी मदद से कई मुश्किल काम आसानी से हो जाते हैं। जीपीएस टेक्नोलॉजी ऐसी ही एक सुविधा है जो सभी स्मार्टफोन में होती है। लेकिन तमाम लोगों को स्मार्ट फोन की खूबियां अभी पूरी तरह से पता नहीं होतीं। अब बनारस के गांवों के युवा जीपीएस टेक्नोलॉजी की बारीकियां जान रहे हैं। यहां सभी गांवों और कस्बों का जीपीएस डाटा बेस जुटाकर एक मोबाइल एप बनाने का काम चल रहा है।
इस प्रोजेक्ट से जुड़े कपिंद्र तिवारी कहते हैं, सही अर्थों में यह एक ऐतिहासिक कार्य है। यह एक ऐसा कार्य है, जो हमेशा प्रासंगिक रहेगा। एक बार डाटाबेस तैयार होने पर आने वाले किसी भी समय के लिए यह एक धरोहर की तरह होगा, क्योंकि किसी स्थान की जीपीएस लोकेशन कभी बदलती नहीं है। कहा कि जिस तरह से जीवन की जटिलताएं समय के साथ बढ़ती जा रही हैं, उन्हें सहज बनाने के लिए इसकी अनिवार्यता होगी। विकास की दौड़ में गांवों के लोग शहरों के मुकाबले बहुत पीछे न छूट जाएं, इसके लिए जो जरूरी उपाय किए जा सकते हैं, उनमें ग्रामीण जीपीएस नेविगेशन एक बहुत ही कारगर उपाय साबित होगा।