आसमान से पूरे बनारस को निहारने के लिए बनाई जा रही स्काई वॉक वाली शहर की सबसे ऊंची इमारत का ब्लू प्रिंट मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लखनऊ में आयोजित अमृत महोत्सव में देखा। वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) के स्टॉल को शिव के डमरू आकार के मॉडल को प्रधानमंत्री ने चलते-चलते देखा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें इस सिग्नेचर बिल्डिंग की जानकारी दी।
पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर बनने वाली भूतल सहित 18 मंजिला इमारत का महोत्सव में प्रदर्शन किया गया। 324.88 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली बिल्डिंग के लिए कमिश्नरी कंपाउंड से पेड़ों कोे शिफ्ट कर लिया गया है और मिट्टी आदि की जांच कर ली गई है। कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही इस परियोजना का टेंडर जारी कर दिया जाएगा। वीडीए की उपाध्यक्ष ईशा दुहन ने बताया कि स्टाल पर पीएम नरेंद्र मोदी ने चलते-चलते प्रोजेक्ट को देखा और उसकी जानकारी ली। बिहार के उप मुख्यमंत्री तारकेश्वर प्रसाद सहित कई अन्य लोगों ने भी परियोजना की जानकारी ली।
डीबीडी मॉडल की पहली परियोजना
रिंग रोड के बाद वाराणसी की यह दूसरी बड़ी परियोजना होगी। इसे तैयार करने वाली कार्यदायी संस्था डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेशन सब पूरा करने के बाद ट्रांसफर करेगी। ऐसे में शासन से मंजूरी के बाद ही इसकी नियम शर्तें तय की जाएंगी। इस भवन की प्लेटिनम रेटिंग की जाएगी। इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) मांगी गई है।
एक नजर में परियोजना
- एकीकृत मंडलीय कार्यालय वाराणसी परियोजना
- 26,051 वर्गमीटर में तैयार होगी दो भूतल सहित 18 मंजिला दो इमारतें
- परियोजना की अनुमानित लागत- 324.88 करोड़
- परियोजना की अनुमानित अवधि- 18 महीने
- दोनोें इमारतों को जोड़ते हुए प्रदेश का पहला स्काई वॉक बनेगा
- 45 सरकारी कार्यालय होंगे शिफ्ट, एक भवन पूरी तरह से कार्यदायी संस्था के जिम्मे